Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र है कसार देवी- कालीमठ पर्वत श्रृंखला

कसार देवी-कालीमठ पर्वत श्रृंखला घने वृक्षों से आच्छादित प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण एक शांतिप्रद रमणीक स्थल है जो ज्ञान की तलाश कर रहे साधकों को बर्बस अपनी ओर आकर्षित करता है। हिमालय की बर्फीली पर्वत श्रृंखलाओं को निहारने एवं आध्यात्मिक शांति की तलाश में जब-तब विश्व प्रसिद्ध चिन्तक कालीमठ पर्वत...

सिस्टर निवेदिता की स्मृतियां संजोये है अल्मोड़ा का निवेदिता काॅटेज

स्वामी विवेकानंद की प्रथम विदेशी शिष्या सिस्टर निवेदिता को कौन नहीं जानता। लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि सिस्टर निवेदिता को भारतीय ध्यान साधना और उसके अनुसरण की प्रक्रिया का ज्ञान स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा में ही दिया था। सिस्टर निवेदिता ने अल्मोड़ा के जिस भवन मे में प्रवास किया उसे आज...

कुमाऊँ के देवालय – निर्माण तथा परिरक्षण

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में प्राचीन मंदिरोंके निर्माण की परम्परा लगभग सातवीं शती से निरन्तर पल्लवित होती रही है। इस क्षेत्र में मंदिर निर्माण क्रमानुसार लकड़ी, ईंट तथा मजबूत पत्थरों इत्यादि से हुआ। लकड़ी की प्रकृति दीर्घजीवी न होने के कारण काष्ठ निर्मित मंदिरों के निर्माण की परम्परा का अवसान...

अल्मोड़ा नगर के रक्षक हैं अष्ट भैरव

उत्तराखंड में सर्वहारा वर्ग के सर्वप्रिय यदि किसी देवता का उल्लेख करना हो तो निश्चित ही वह देवता हैं-भैरव। पर्वतीय समाज में उन्हें लौकिक देवता का स्थान मिला हुआ है। उनके छोटे- छोटे मंदिर निर्जन वनों से लेकर गांव- समाज के आसपास की बसासत तक सभी जगह मिलते हैं। शिव रूप भैरव को ना केवल उग्र देवता के रूप...

गोल्ल मंदिर चितई-अल्मोड़ा

“काली गंगा में बगायो गोरी गंगा में उतरो तब गोरिया नाम पडो..” यह लोक काव्य की पंक्तियां कुमाऊँ के न्यायकारी लोकमानस के आराध्य देवता गोल्ल अथवा गोरिल के जागर में जगरियों द्वारा गायी जाती हैं । गोल्ल को कुमाऊं में स्थान व बोली के आधार पर अनेक नामों से पुकारा जाता है । वे चौधाणी गोरिया...

जन- जन के आराध्य हैं बाबा गंगनाथ

पर्वतीय क्षेत्रों में बाबा गंगनाथ का बड़ा मान है। वे जन- जन के आराध्य लोक देवता हैं। बाबा गंगनाथ की लोकप्रियता का प्रमाण जगह -जगह स्थापित किये गये उनके वे मंदिर हैं जो वनैले प्रान्तरों से लेकर ग्राम, नगर और राज्य की सीमा पार कर उनके भक्तों द्वारा स्थापित किये गये हैं। इन्हीं में से एक है अल्मोड़ा...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक विकास-तीर्थ के रूप में उभर कर आया है। कौशल सक्सेना...

न्याय देती हैं कोटगाड़ी की मां भगवती

उत्तराखंड की सुंदर पहाड़ियों में बसा कोकिला देवी कोटगाड़ी भगवती मंदिर ईश्वरीय न्याय का एक शक्तिशाली प्रतीक है। निष्पक्षता और धार्मिकता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजी जाने वाली भगवती मां की पूजा भक्तगण व्यक्तिगत विपत्तियों को दूर करने की प्रार्थना के साथ करते हैं। यहां भक्त अपनी आपदा-विपदा...

नंदादेवी मेला – अल्मोड़ा

समूचे पर्वतीय क्षेत्र में हिमालय की पुत्री नंदा का बड़ा सम्मान है । उत्तराखंड में भी नंदादेवी के अनेकानेक मंदिर हैं । यहाँ की अनेक नदियाँ, पर्वत श्रंखलायें, पहाड़ और नगर नंदा के नाम पर है । नंदादेवी, नंदाकोट, नंदाभनार...

ज्योतिर्लिंग जागेश्वर

हिमालय शिव का आवास है । इसकी पर्वत श्रेणियों पर शिव सर्वत्र विचरण करते हैं। शिव के उन्मुक्त विचरण के कारण ही मध्य हिमालय की इन श्रृंखलाओं को शिवालिक के नाम से जाना जाता है । इसी शिवालिक अंचल में अल्मोड़ा नगर से ३५ किमी...

उत्तराखंड में कुबेर

उत्तर दिशा के दिक्पाल कुबेर धन व विलास के देवता कहे गये हैं। वे यक्षों के अधिपति हैं। प्राचीन ग्रंथों में उन्हें वैश्रवण, निधिपति एवं धनद नामों से भी सम्बोधित किया गया है। वे ब्रहमा के मानस पुत्र पुलस्त ऋषि तनय वैश्रवा...

प्रस्तर शिल्प में गंगा

भारतीय मानस में गंगा का स्वरूप केवल जलधारा अथवा वेगमती सरिता का नहीं है। वे समूचे भारतीय समाज में जिस रूप में बसी हैं उसकी व्याख्या करना भी सम्भव नहीं है। उनका स्वरूप आध्यात्मिक है, दिव्य है, वत्सल है, चारू है और मां के...

कूर्मांचल की रामलीला का समृद्ध इतिहास है

देश की प्रसिद्व रामलीलाओं में कूर्माचलीय रामलीला का एक समृद्ध इतिहास है। कूर्मांचलीय रामलीला ने हिन्दी रंगमंच के इतिहास तथा देश की प्रसिद्ध रामलीलाओं में अपनी मौलिकता, कलात्मकता, संगीत एवं रागरागिनियों में निबद्ध होने...

कुमाऊँ के नौलेः कला एवं परम्परा

सृष्टि में जीवन की उत्पत्ति का मूल आधार जल है। मानवीय बसासत को बस्ती का रूप देने के लिए नजदीक में जल की निरन्तर उपलब्घता एवं स्वच्छ जल का निरन्तर प्रवाहमान स्त्रोत अनिवार्य तत्व रहा। मानवीय आवास इसीलिए सबसे पहले जल के...

कुमाऊं में दुर्ग परम्परा

प्राचीन भारतीय राज व्यवस्था में सीमाओं की सुरक्षा का प्रश्न सर्वदा महत्वपूर्ण रहा है। राज्य की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमाओं की सुरक्षा के लिए तत्कालीन शासको द्वारा की गयी व्यवस्थाओं के कई साक्ष्य दृष्टिगत होते...

प्राचीन मानव की सुन्दरतम अभिव्यक्ति हैं शैलचित्र

शिलाचित्र मानव की सुन्दरतम अभिव्यक्ति ही नहीं वरन् उसकी अमूल्य धरोहर भी हैं । माना जा सकता है कि जबसे पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन प्रारम्भ हुआ तभी से कला का भी उद्भव हो गया होगा । कला एक इतिहास ही नहीं वरन् सृजन भी है ।...

बौद्ध आश्रम कसार देवी अल्मोड़ा

अल्मोड़ा का अन्तराष्ट्रीय बौद्ध आश्रम उच्च स्तरीय ध्यान एवं साधना करने वाले देसी विदेशी साधकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र है। यह साधना केन्द्र बौद्ध धर्म अनुयायियों की कग्युग शाखा का उत्तराखंड में स्थापित सबसे...

error: Content is protected !!