Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

अल्मोड़ा में ब्रिटिश युग के बंगले

अल्मोड़ा हिमालय की गोद में बसा एक सुरम्य नगर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस सुन्दर नगर में छिपे हुए अनेक खूबसूरत बंगले हैं जो औपनिवेशिक युग की याद दिलाते हैं जब अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया था। अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के साथ...

बाखली – जहाँ दिल-दीवारें साझा थीं

पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा संयुक्त परिवारों के एक ही स्थान पर रहने की याद दिलाती है। कुमोटी ग्राम की बाखली...

बाणासुर का किला लोहाघाट

लोहाघाट-देवीधुरा मोटर मार्ग से सात किमी. की दूरी तथा कर्ण करायत बस स्टाप से एक किमी. की दूरी पर बाणासुर का किला एक ऊँची चोटी पर स्थित है । इस किले के दक्षिण में काली कुमाऊँ की हरी भरी घाटी विस्तार पाती है । लोहावती घाटी लोहाघाट ते सलना तक विस्तृत है । इस घाटी के मध्य में मायावती नामक छोटी सी जलधारा...

कुमाऊँ के भवनों का काष्ठ शिल्प

प्रागैतिहासिक मानव के कदम ज्यो-ज्यों सभ्यता की ओर की बढे उसकी पहली नजर लकड़ी पर पड़ी जो अपनी प्रकृति के कारण मानव आश्रयों के अभिप्राय गढ़ने के लिए कहीं ज्यादा उपयुक्त थी। ज्यों-ज्यों मानव का कला और अलंकरणों के प्रति झुकाव बढता गया उसने कालान्तर में अपने आवास में लकड़ी का प्रयोग कर उन्हें भव्य रूप देना...

कुमाऊँ की धर्मशालायें

पर्वतीय क्षेत्र के पुराने पैदल यात्रा मार्ग पर जाने वाले यात्रियों को वीरान क्षेत्रों में नौ-नौ मील की दूरी पर पत्थर से बने हुए बिना दरवाजे के भवन सहज ही आकर्षित करते हैं। ये वे धर्मशालायें हैं जिनका प्रयोग पूर्व में पैदल यात्री रात्रि पड़ाव के लिए किया करते थे। नौलों, धारों अथवा नदियों के किनारे...

श्रेणी: भवन एवं दुर्ग परम्परा

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अल्मोड़ा में ब्रिटिश युग के बंगले

अल्मोड़ा हिमालय की गोद में बसा एक सुरम्य नगर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस सुन्दर नगर में छिपे हुए अनेक खूबसूरत बंगले हैं जो औपनिवेशिक युग की याद...

बाखली – जहाँ दिल-दीवारें साझा थीं

पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा...

बाणासुर का किला लोहाघाट

लोहाघाट-देवीधुरा मोटर मार्ग से सात किमी. की दूरी तथा कर्ण करायत बस स्टाप से एक किमी. की दूरी पर बाणासुर का किला एक ऊँची चोटी पर स्थित है । इस किले के दक्षिण में काली कुमाऊँ की हरी भरी घाटी विस्तार पाती है । लोहावती घाटी...

कुमाऊँ के भवनों का काष्ठ शिल्प

प्रागैतिहासिक मानव के कदम ज्यो-ज्यों सभ्यता की ओर की बढे उसकी पहली नजर लकड़ी पर पड़ी जो अपनी प्रकृति के कारण मानव आश्रयों के अभिप्राय गढ़ने के लिए कहीं ज्यादा उपयुक्त थी। ज्यों-ज्यों मानव का कला और अलंकरणों के प्रति झुकाव...

कुमाऊँ की धर्मशालायें

पर्वतीय क्षेत्र के पुराने पैदल यात्रा मार्ग पर जाने वाले यात्रियों को वीरान क्षेत्रों में नौ-नौ मील की दूरी पर पत्थर से बने हुए बिना दरवाजे के भवन सहज ही आकर्षित करते हैं। ये वे धर्मशालायें हैं जिनका प्रयोग पूर्व में...

कुमाऊं में दुर्ग परम्परा

प्राचीन भारतीय राज व्यवस्था में सीमाओं की सुरक्षा का प्रश्न सर्वदा महत्वपूर्ण रहा है। राज्य की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमाओं की सुरक्षा के लिए तत्कालीन शासको द्वारा की गयी व्यवस्थाओं के कई साक्ष्य दृष्टिगत होते...

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