Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद

हिमालय की शांत पर्वत-श्रृंखलाओं में बसा अल्मोड़ा केवल एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नगर नहीं है, बल्कि यह भारत के महान संन्यासी और विचारक स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा में तीन बार प्रवास किया। हिमांशु साह...

अल्मोड़ा की नंदादेवी और उनकी विरासत

उत्तराखंड की देवभूमि में नंदादेवी केवल एक देवी नहीं, बल्कि समूचे उत्तराखंड की सामूहिक एकरूपता की भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। अल्मोड़ा स्थित नंदादेवी मंदिर आज जिस श्रद्धा और सम्मान का केंद्र है, उसका इतिहास सदियों पुराना है और कई सांस्कृतिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। नंदादेवी की ऐतिहासिक...

न्याय देती हैं कोटगाड़ी की मां भगवती

उत्तराखंड की सुंदर पहाड़ियों में बसा कोकिला देवी कोटगाड़ी भगवती मंदिर ईश्वरीय न्याय का एक शक्तिशाली प्रतीक है। निष्पक्षता और धार्मिकता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजी जाने वाली भगवती मां की पूजा भक्तगण व्यक्तिगत विपत्तियों को दूर करने की प्रार्थना के साथ करते हैं। यहां भक्त अपनी आपदा-विपदा...

कुमाऊँ के देवालय – निर्माण तथा परिरक्षण

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में प्राचीन मंदिरोंके निर्माण की परम्परा लगभग सातवीं शती से निरन्तर पल्लवित होती रही है। इस क्षेत्र में मंदिर निर्माण क्रमानुसार लकड़ी, ईंट तथा मजबूत पत्थरों इत्यादि से हुआ। लकड़ी की प्रकृति दीर्घजीवी न होने के कारण काष्ठ निर्मित मंदिरों के निर्माण की परम्परा का अवसान...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक विकास-तीर्थ के रूप में उभर कर आया है। कौशल सक्सेना...

कुमाऊँ में होली गायन

ऋतुराज बसंत के आगमन और फागुन के प्रारम्भ होते ही उत्तर भारत में सर्दी का खुशनुमा मौसम उमंग भरे दिलों में मीठी सिहरन भर देता है । ऋतुराज बसंत फूलों की मादकता से मानव मन को रंग डालते हैं । फगुनाहट के परिवेश में होली पर्व को कारक बनाकर गीत संगीत के माध्यम से अभिव्यक्ति की अपनी परम्परा है । कुमाऊँ में...

स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है काकड़ीघाट

स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक यात्रा में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित काकड़ीघाट का विशेष स्थान है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ उन्होंने ऐसी गहन अनुभूति का अनुभव किया जिसने ब्रह्मांड के बारे में उनकी जिज्ञासा का स्पष्ट समाधान किया। अभी भी काकडी़घाट का शांत और पवित्र वातावरण भक्तों और आगंतुकों को...

न्यायकारी हैं लोकदेवता कलबिष्ट

अल्मोड़ा से 16 किमी. की दूरी पर अल्मोड़ा-ताकुला मोटर मार्ग में कफड़खान से लगभग तीन किमी आगे की ओर जाकर घने जंगलों के मध्य लोकदेवता कलबिष्ट का प्रसिद्ध मंदिर है। इस स्थान को अब कलबिष्ट गैराड़ गोलू धाम के नाम से जाना जाता है। मंदिर जाने के लिए बिन्सर वाइल्ड लाइफ सेन्चुरी के मुख्य प्रवेश द्वार से लगभग...

सुरों की थाप पर संकट: आधुनिकता की मशीन में पिसती उत्तराखण्ड की विरासत ‘हुड़का’

उत्तराखण्ड की वादियों में जब ढोल, दमाऊ, नगाड़ा और थाली की गूँज उठती है, तो यहाँ की संस्कृति जीवंत हो उठती है। इन सभी अवनद्ध वाद्य यंत्रों (Membranophones) में एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे उत्तराखण्ड के लोक संगीत का...

उत्तराखन्ड के ताल वाद्य – “दमुआ-ढोल”

भारतीय आध्यात्मिक चेतना में नटराज शिव का आवास कैलाश पर्वत पर स्थापित है और हिमालय का समूचा शिवालिक अंचल शिव की रंगस्थली है। संगीत के आदि प्रतिपादक आदिदेव शिव के कण-कण में रमे होने के कारण ही देवभूमि का लोकजीवन भी नाद...

खोली: पत्थर के मकानों पर लकड़ी का श्रृंगार

कुमाऊँ क्षेत्र में पारंपरिक मकानों की सबसे बड़ी विशेषता उनका नक्काशीदार, भव्य एवं विशाल मुख्य प्रवेशद्वार है जिसे स्थानीय भाषा में खोली कहते हैं। खोली इन मकानों की भावनात्मक पहचान है। यह द्वार केवल घर के अंदर आने का...

बाखली – जहाँ दिल-दीवारें साझा थीं

पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा...

कसार देवी मंदिर -अल्मोड़ा

अल्मोड़ा नगर से सात किमी की दूरी पर अल्मोड़ा- कफड़खान मार्ग पर पुरातन शक्तिपीठ कसारदेवी एक उंची चोटी पर स्थित है। स्कंद पुराण के मानस खंड में अल्मोड़ा के पास जिस काषाय पर्वत का उल्लेख है वह सम्भवतः कसारदेवी पर्वत ही है।...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम...

अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद

हिमालय की शांत पर्वत-श्रृंखलाओं में बसा अल्मोड़ा केवल एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नगर नहीं है, बल्कि यह भारत के महान संन्यासी और विचारक स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम...

अल्मोड़ा -एक सांस्कृतिक नगर

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर अल्मोड़ा कुमाऊँ का प्राचीन एवं ऐतिहासिक नगर है। इसके रमणीक सौन्दर्य से प्रभावित देश-विदेश से पर्यटक आध्यात्मिक अनुभूति तथा प्राकृतिक सौन्दर्य के रसास्वादन के लिए भारी संख्या में अल्मोड़ा आते...

नंदादेवी अल्मोड़ा- प्रतिमा निर्माण

नन्दादेवी का मेला भाद्रमास की पंचमी से प्रारम्भ होता है जिसमें नन्दा एवं सुनन्दा की केले की वृक्षों से दो प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इस प्रतिमाओं का निर्माण करने के लिए नगर के ऐसे व्यक्तियों, जिनके बगीचों में केले के...