Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है काकड़ीघाट

स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक यात्रा में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित काकड़ीघाट का विशेष स्थान है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ उन्होंने ऐसी गहन अनुभूति का अनुभव किया जिसने ब्रह्मांड के बारे में उनकी जिज्ञासा का स्पष्ट समाधान किया। अभी भी काकडी़घाट का शांत और पवित्र वातावरण भक्तों और आगंतुकों को...

गोल्ल मंदिर चितई-अल्मोड़ा

“काली गंगा में बगायो गोरी गंगा में उतरो तब गोरिया नाम पडो..” यह लोक काव्य की पंक्तियां कुमाऊँ के न्यायकारी लोकमानस के आराध्य देवता गोल्ल अथवा गोरिल के जागर में जगरियों द्वारा गायी जाती हैं । गोल्ल को कुमाऊं में स्थान व बोली के आधार पर अनेक नामों से पुकारा जाता है । वे चौधाणी गोरिया...

अल्मोड़ा की नंदादेवी और उनकी विरासत

उत्तराखंड की देवभूमि में नंदादेवी केवल एक देवी नहीं, बल्कि समूचे उत्तराखंड की सामूहिक एकरूपता की भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। अल्मोड़ा स्थित नंदादेवी मंदिर आज जिस श्रद्धा और सम्मान का केंद्र है, उसका इतिहास सदियों पुराना है और कई सांस्कृतिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। नंदादेवी की ऐतिहासिक...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक विकास-तीर्थ के रूप में उभर कर आया है। कौशल सक्सेना...

कुमाऊँ में होली गायन

ऋतुराज बसंत के आगमन और फागुन के प्रारम्भ होते ही उत्तर भारत में सर्दी का खुशनुमा मौसम उमंग भरे दिलों में मीठी सिहरन भर देता है । ऋतुराज बसंत फूलों की मादकता से मानव मन को रंग डालते हैं । फगुनाहट के परिवेश में होली पर्व को कारक बनाकर गीत संगीत के माध्यम से अभिव्यक्ति की अपनी परम्परा है । कुमाऊँ में...

न्याय देती हैं कोटगाड़ी की मां भगवती

उत्तराखंड की सुंदर पहाड़ियों में बसा कोकिला देवी कोटगाड़ी भगवती मंदिर ईश्वरीय न्याय का एक शक्तिशाली प्रतीक है। निष्पक्षता और धार्मिकता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजी जाने वाली भगवती मां की पूजा भक्तगण व्यक्तिगत विपत्तियों को दूर करने की प्रार्थना के साथ करते हैं। यहां भक्त अपनी आपदा-विपदा...

भक्तों की सुनते हैं बाबा नीम करोली

एक युवा तेजस्वी साधक अपनी लय में चिमटा कमंडल जैसे परम्परागत साधुओं के सामान सहित टुण्डला की ओर जाती एक रेलगाड़ी के प्रथम श्रेंणी के डिब्बे में बैठ गया। एंग्लो इंडियन टिकट चैकर को इस अधनंगे साधु की यह धृष्टता नहीं भायी । उसने क्रोधित होकर साधु से जब टिकट मांगा तो साधु ने टिकट देने से भी इंकार कर...

न्यायकारी हैं लोकदेवता कलबिष्ट

अल्मोड़ा से 16 किमी. की दूरी पर अल्मोड़ा-ताकुला मोटर मार्ग में कफड़खान से लगभग तीन किमी आगे की ओर जाकर घने जंगलों के मध्य लोकदेवता कलबिष्ट का प्रसिद्ध मंदिर है। इस स्थान को अब कलबिष्ट गैराड़ गोलू धाम के नाम से जाना जाता है। मंदिर जाने के लिए बिन्सर वाइल्ड लाइफ सेन्चुरी के मुख्य प्रवेश द्वार से लगभग...

उत्तराखन्ड के ताल वाद्य – “दमुआ-ढोल”

भारतीय आध्यात्मिक चेतना में नटराज शिव का आवास कैलाश पर्वत पर स्थापित है और हिमालय का समूचा शिवालिक अंचल शिव की रंगस्थली है। संगीत के आदि प्रतिपादक आदिदेव शिव के कण-कण में रमे होने के कारण ही देवभूमि का लोकजीवन भी नाद...

बाखली – जहाँ दिल-दीवारें साझा थीं

पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा...

श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् (डोल आश्रम )कनरा अल्मोड़ा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 40 किमी दूर लमगड़ा के पास कनरा गाँव की शांत वादियों में स्थित, डोल आश्रम श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् एक आध्यात्मिक आश्रम है । घने हिमालयी जंगलों के बीच 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस...

कसार देवी मंदिर -अल्मोड़ा

अल्मोड़ा नगर से सात किमी की दूरी पर अल्मोड़ा- कफड़खान मार्ग पर पुरातन शक्तिपीठ कसारदेवी एक उंची चोटी पर स्थित है। स्कंद पुराण के मानस खंड में अल्मोड़ा के पास जिस काषाय पर्वत का उल्लेख है वह सम्भवतः कसारदेवी पर्वत ही है।...

अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद

हिमालय की शांत पर्वत-श्रृंखलाओं में बसा अल्मोड़ा केवल एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नगर नहीं है, बल्कि यह भारत के महान संन्यासी और विचारक स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम...

उत्तरांचल के लोकगीतों में नंदा

अल्मोड़ा में ग्रीष्म की पीली उदास धुंधलाई संध्या की इस वेला में……..मैं एकाकी बैठा कसार देवी के शिखर पर….और देख रहा हूं सुदूर हिमाच्छादित नंदा देवी के शिखर को! थके मांदे सूरज की अस्तमुखी किरणें कुहासे में डूबे धूमिल...

अल्मोड़ा -एक सांस्कृतिक नगर

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर अल्मोड़ा कुमाऊँ का प्राचीन एवं ऐतिहासिक नगर है। इसके रमणीक सौन्दर्य से प्रभावित देश-विदेश से पर्यटक आध्यात्मिक अनुभूति तथा प्राकृतिक सौन्दर्य के रसास्वादन के लिए भारी संख्या में अल्मोड़ा आते...

नन्दा : विविध रूपों में

वैदिक एवं पुराण साहित्य में हिमालय (हैमवत) को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि शिव और शक्ति का निवास स्थान कहा गया है। ऋग्वेद में हिमालय को देवताओं के निवास के रूप में वर्णित किया गया है। महाभारत में भी इसे देवताओं का...

अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर : आस्था, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का केन्द्र

अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कुमाऊँ की सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र है। तीन शताब्दियों से अधिक पुराना यह मंदिर उस दौर का साक्षी है जब आस्था और राजनीति एक साथ...

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