Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

जन- जन के आराध्य हैं बाबा गंगनाथ

पर्वतीय क्षेत्रों में बाबा गंगनाथ का बड़ा मान है। वे जन- जन के आराध्य लोक देवता हैं। बाबा गंगनाथ की लोकप्रियता का प्रमाण जगह -जगह स्थापित किये गये उनके वे मंदिर हैं जो वनैले प्रान्तरों से लेकर ग्राम, नगर और राज्य की सीमा पार कर उनके भक्तों द्वारा स्थापित किये गये हैं। इन्हीं में से एक है अल्मोड़ा...

कुमाऊँ के देवालय – निर्माण तथा परिरक्षण

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में प्राचीन मंदिरोंके निर्माण की परम्परा लगभग सातवीं शती से निरन्तर पल्लवित होती रही है। इस क्षेत्र में मंदिर निर्माण क्रमानुसार लकड़ी, ईंट तथा मजबूत पत्थरों इत्यादि से हुआ। लकड़ी की प्रकृति दीर्घजीवी न होने के कारण काष्ठ निर्मित मंदिरों के निर्माण की परम्परा का अवसान...

सिस्टर निवेदिता की स्मृतियां संजोये है अल्मोड़ा का निवेदिता काॅटेज

स्वामी विवेकानंद की प्रथम विदेशी शिष्या सिस्टर निवेदिता को कौन नहीं जानता। लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि सिस्टर निवेदिता को भारतीय ध्यान साधना और उसके अनुसरण की प्रक्रिया का ज्ञान स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा में ही दिया था। सिस्टर निवेदिता ने अल्मोड़ा के जिस भवन मे में प्रवास किया उसे आज...

कुमाऊँ में होली गायन

ऋतुराज बसंत के आगमन और फागुन के प्रारम्भ होते ही उत्तर भारत में सर्दी का खुशनुमा मौसम उमंग भरे दिलों में मीठी सिहरन भर देता है । ऋतुराज बसंत फूलों की मादकता से मानव मन को रंग डालते हैं । फगुनाहट के परिवेश में होली पर्व को कारक बनाकर गीत संगीत के माध्यम से अभिव्यक्ति की अपनी परम्परा है । कुमाऊँ में...

अल्मोड़ा के मल्ला महल का समृद्ध इतिहास है

अल्मोड़ा की बसासत के दूसरे चरण के अन्तर्गत राजा रूद्रचंद के कार्यकाल 1588-89 में एक नये अष्ट पहल राजनिवास का निर्माण नगर के मध्य में करवाया गया था जो मल्ला महल कहलाता है। इस महल के संरचनागत निर्माण से लगता है कि देवी मंदिर तथा भैरव मंदिर ही प्रारम्भ में बनाये गये थे तथा पानी के संग्रहण के लिए...

गोल्ल मंदिर चितई-अल्मोड़ा

“काली गंगा में बगायो गोरी गंगा में उतरो तब गोरिया नाम पडो..” यह लोक काव्य की पंक्तियां कुमाऊँ के न्यायकारी लोकमानस के आराध्य देवता गोल्ल अथवा गोरिल के जागर में जगरियों द्वारा गायी जाती हैं । गोल्ल को कुमाऊं में स्थान व बोली के आधार पर अनेक नामों से पुकारा जाता है । वे चौधाणी गोरिया...

न्यायकारी हैं लोकदेवता कलबिष्ट

अल्मोड़ा से 16 किमी. की दूरी पर अल्मोड़ा-ताकुला मोटर मार्ग में कफड़खान से लगभग तीन किमी आगे की ओर जाकर घने जंगलों के मध्य लोकदेवता कलबिष्ट का प्रसिद्ध मंदिर है। इस स्थान को अब कलबिष्ट गैराड़ गोलू धाम के नाम से जाना जाता है। मंदिर जाने के लिए बिन्सर वाइल्ड लाइफ सेन्चुरी के मुख्य प्रवेश द्वार से लगभग...

हिमालय में प्रसारित प्रथम मुद्रायें हैं कुणिंद सिक्के

अल्मोड़ा का राजकीय संग्रहालय अपनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों के कारण इतिहासविदों, मुद्रा शास्त्रियों एवं पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है। यहां प्रदर्शित दुर्लभ कुणिन्द मुद्रायें केवल अल्मोड़ा, शिमला (हिंमाचल प्रदेश) तथा ब्रिटिश म्यूजियम में ही हैं। प्रारम्भ में कुणिन्दों की मुद्रायें केवल अल्मोड़ा...

खोली: पत्थर के मकानों पर लकड़ी का शृंगार

के ग्रामीण परिवेश में आज भी पुराने दरवाजे और खिड़कियां जिनके उपर महीन नक्काशी की गई है, मौजूद हैं। कुमाऊँ मंडल के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चम्पावत तथा बागेश्वर इस कला में अति समृद्ध हैं। पर्वतीय क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों...

श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् (डोल आश्रम )कनरा अल्मोड़ा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 40 किमी दूर लमगड़ा के पास कनरा गाँव की शांत वादियों में स्थित, डोल आश्रम श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् एक आध्यात्मिक आश्रम है । घने हिमालयी जंगलों के बीच 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस...

कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा

स्वप्निल सक्सेना अल्मोड़ा नगर से सात किमी की दूरी पर अल्मोड़ा- कफड़खान मार्ग पर पुरातन शक्तिपीठ कसारदेवी एक उंची चोटी पर स्थित है। स्कंद पुराण के मानस खंड में अल्मोड़ा के पास जिस काषाय पर्वत का उल्लेख है वह सम्भवतः कसारदेवी...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम...

उत्तरांचल के लोकगीतों में नन्दा

अल्मोड़ा में ग्रीष्म की पीली उदास धुंधलाई सन्ध्या की इस वेला में……..मैं एकाकी बैठा कसार देवी के शिखर पर….और देख रहा हूं सुदूर हिमाच्छादित नन्दादेवी के शिखर को! थके मांदे सूरज की अस्तमुखी किरणें कुहासे में डूबे धूमिल...

अल्मोड़ा -एक सांस्कृतिक नगर

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर अल्मोड़ा कुमाऊँ का प्राचीन एवं ऐतिहासिक नगर है। इसकेरमणीक सौन्दर्य से प्रभावित देश-विदेश से पर्यटक आध्यात्मिक अनुभूति तथा प्राकृतिक सौन्दर्यके रसास्वादन के लिए भारी संख्या में अल्मोड़ा आते हैं।...

नंदादेवी अल्मोड़ा- प्रतिमा निर्माण

नन्दादेवी का मेला भाद्रमास की पंचमी से प्रारम्भ होता है जिसमें नन्दा एवं सुनन्दा की केले की वृक्षों से दो प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इस प्रतिमाओं का निर्माण करने के लिए नगर के ऐसे व्यक्तियों, जिनके बगीचों में केले के...

अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर : आस्था, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का केन्द्र

नंदा देवी मंदिर, अल्मोड़ा : आस्था, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना का केन्द्र अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कुमाऊँ की सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र है। तीन...

कुमाऊँ में नंदा राजजात की परंपरा

नंदा राजजात गढ़वाल–कुमाऊँ की साझा सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान की सबसे विराट यात्रा मानी जाती है। कुमाऊँ में इसकी परंपरा, ऐतिहासिक घटनाओं और 2000 में पुनः प्रारंभ हुई भागीदारी को तीन प्रमुख चरणों में समझा जा...

error: Content is protected !!