ऋतुराज बसंत के आगमन और फागुन के प्रारम्भ होते ही उत्तर भारत में सर्दी का खुशनुमा मौसम उमंग भरे दिलों में मीठी सिहरन भर देता है । ऋतुराज बसंत फूलों की मादकता से मानव मन को रंग डालते हैं । फगुनाहट के परिवेश में होली पर्व को कारक बनाकर गीत संगीत के माध्यम से अभिव्यक्ति की अपनी परम्परा है । कुमाऊँ में...
सुरों की थाप पर संकट: आधुनिकता की मशीन में पिसती उत्तराखण्ड की विरासत ‘हुड़का’
उत्तराखण्ड की वादियों में जब ढोल, दमाऊ, नगाड़ा और थाली की गूँज उठती है, तो यहाँ की संस्कृति जीवंत हो उठती है। इन सभी अवनद्ध वाद्य यंत्रों (Membranophones) में एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे उत्तराखण्ड के लोक संगीत का...









