Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

कुमाऊँ के देवालय – निर्माण तथा परिरक्षण

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में प्राचीन मंदिरोंके निर्माण की परम्परा लगभग सातवीं शती से निरन्तर पल्लवित होती रही है। इस क्षेत्र में मंदिर निर्माण क्रमानुसार लकड़ी, ईंट तथा मजबूत पत्थरों इत्यादि से हुआ। लकड़ी की प्रकृति दीर्घजीवी न होने के कारण काष्ठ निर्मित मंदिरों के निर्माण की परम्परा का अवसान...

कुमाऊँ की आराध्य देवी हैं – हाट कालिका गंगोलीहाट

यूँ तो कुमाऊँ का कण-कण सौन्दर्य से परिपूर्ण है लेकिन कुछ स्थल ऐसे भी हैं जहा जाकर मन सम्मोहन की सीमा में पहुंच जाता है । पिथौरागढ जनपद के गंगोलीहाट कस्बे का काली मंदिर इनमें से एक है । गंगोली कस्बे की खूबसूरत घाटी में बना हाट कालिका मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं तथा साधकों को श्रद्धा से वशीभूत करता...

अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद

हिमालय की शांत पर्वत-श्रृंखलाओं में बसा अल्मोड़ा केवल एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नगर नहीं है, बल्कि यह भारत के महान संन्यासी और विचारक स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा में तीन बार प्रवास किया। स्वामी...

कुमाऊँ में होली गायन

ऋतुराज बसंत के आगमन और फागुन के प्रारम्भ होते ही उत्तर भारत में सर्दी का खुशनुमा मौसम उमंग भरे दिलों में मीठी सिहरन भर देता है । ऋतुराज बसंत फूलों की मादकता से मानव मन को रंग डालते हैं । फगुनाहट के परिवेश में होली पर्व को कारक बनाकर गीत संगीत के माध्यम से अभिव्यक्ति की अपनी परम्परा है । कुमाऊँ में...

स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है काकड़ीघाट

स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक यात्रा में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित काकड़ीघाट का विशेष स्थान है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ उन्होंने ऐसी गहन अनुभूति का अनुभव किया जिसने ब्रह्मांड के बारे में उनकी जिज्ञासा का स्पष्ट समाधान किया। अभी भी काकडी़घाट का शांत और पवित्र वातावरण भक्तों और आगंतुकों को...

बाबा नीब करौरी की लीला स्थली है कैंची धाम

हल्द्वानी से अल्मोड़ा की ओर मोटर मार्ग पर भवाली से थोड़ी ही दूरी पर इठलाती बलखाती एक छोटी सी नदी नैनीताल एवं अल्मोड़ा जनपदों की सीमा रेखा को खींचती हुई बहती है। इस नदी को बाबा नीम करोली ने उत्तर वाहिनी नाम दिया। उत्तर वाहिनी के तट पर भवाली से सात किमी आगे अल्मोड़ा की ओर मोड़ घूमते ही सिन्दूरी...

भक्तों की सुनते हैं बाबा नीम करोली

एक युवा तेजस्वी साधक अपनी लय में चिमटा कमंडल जैसे परम्परागत साधुओं के सामान सहित टुण्डला की ओर जाती एक रेलगाड़ी के प्रथम श्रेंणी के डिब्बे में बैठ गया। एंग्लो इंडियन टिकट चैकर को इस अधनंगे साधु की यह धृष्टता नहीं भायी । उसने क्रोधित होकर साधु से जब टिकट मांगा तो साधु ने टिकट देने से भी इंकार कर...

हिमालय में प्रसारित प्रथम मुद्रायें हैं कुणिंद सिक्के

अल्मोड़ा का राजकीय संग्रहालय अपनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों के कारण इतिहासविदों, मुद्रा शास्त्रियों एवं पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है। यहां प्रदर्शित दुर्लभ कुणिन्द मुद्रायें केवल अल्मोड़ा, शिमला (हिंमाचल प्रदेश) तथा ब्रिटिश म्यूजियम में ही हैं। प्रारम्भ में कुणिन्दों की मुद्रायें केवल अल्मोड़ा...

श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् (डोल आश्रम )कनरा अल्मोड़ा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 40 किमी दूर लमगड़ा के पास कनरा गाँव की शांत वादियों में स्थित, डोल आश्रम श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् एक आध्यात्मिक आश्रम है । घने हिमालयी जंगलों के बीच 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस...

कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा

स्वप्निल सक्सेना अल्मोड़ा नगर से सात किमी की दूरी पर अल्मोड़ा- कफड़खान मार्ग पर पुरातन शक्तिपीठ कसारदेवी एक उंची चोटी पर स्थित है। स्कंद पुराण के मानस खंड में अल्मोड़ा के पास जिस काषाय पर्वत का उल्लेख है वह सम्भवतः कसारदेवी...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम...

उत्तरांचल के लोकगीतों में नन्दा

अल्मोड़ा में ग्रीष्म की पीली उदास धुंधलाई सन्ध्या की इस वेला में……..मैं एकाकी बैठा कसार देवी के शिखर पर….और देख रहा हूं सुदूर हिमाच्छादित नन्दादेवी के शिखर को! थके मांदे सूरज की अस्तमुखी किरणें कुहासे में डूबे धूमिल...

अल्मोड़ा -एक सांस्कृतिक नगर

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर अल्मोड़ा कुमाऊँ का प्राचीन एवं ऐतिहासिक नगर है। इसकेरमणीक सौन्दर्य से प्रभावित देश-विदेश से पर्यटक आध्यात्मिक अनुभूति तथा प्राकृतिक सौन्दर्यके रसास्वादन के लिए भारी संख्या में अल्मोड़ा आते हैं।...

नंदादेवी अल्मोड़ा- प्रतिमा निर्माण

नन्दादेवी का मेला भाद्रमास की पंचमी से प्रारम्भ होता है जिसमें नन्दा एवं सुनन्दा की केले की वृक्षों से दो प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इस प्रतिमाओं का निर्माण करने के लिए नगर के ऐसे व्यक्तियों, जिनके बगीचों में केले के...

अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर : आस्था, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का केन्द्र

नंदा देवी मंदिर, अल्मोड़ा : आस्था, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना का केन्द्र अल्मोड़ा का नंदा देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कुमाऊँ की सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र है। तीन...

कुमाऊँ में नंदा राजजात की परंपरा

नंदा राजजात गढ़वाल–कुमाऊँ की साझा सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान की सबसे विराट यात्रा मानी जाती है। कुमाऊँ में इसकी परंपरा, ऐतिहासिक घटनाओं और 2000 में पुनः प्रारंभ हुई भागीदारी को तीन प्रमुख चरणों में समझा जा...

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