हिमालय की मिनिएचर पेंटिंग के चितेरे हैं प्रभात जोशी

प्रकृति की विराटता को समझ पाना तथा उसे सूक्ष्मतम रूप में अभिव्यक्त कर देने का हुनर बिरला लोगों को ही मिलता है। अल्मो़ड़ा निवासी प्रभात जोशी भी उन बिरला लोगों में से एक हैं जिन्होंने हिमालय के विविध रंगों तथा सौंदर्य को अपने सैक़डों मिनिएचर चित्रों के माध्यम से उकेरा है। उनके लघु चित्रों में हिमालय...

होली की बैठकें खोजती हैं तारी मास्साब को

होली की बैठकें खोजती हैं तारी मास्साब को — कौशल किशोर सक्सेना, नवीन बिष्ट तारी मास्साब की अब केवल याद रह गई है। दो बरस ही हुए हैं तारी मास्साब को। वे होलियारों को होली गायकी से सराबोर कर देते थे। माधुर्य लोच और तरंगिन का मिला हुआ रूप था उनकी गायकी। इस बरस कहीं खो गया है वह स्वर। होली की बैठकों की...

सुरों की थाप पर संकट: आधुनिकता की मशीन में पिसती उत्तराखण्ड की विरासत ‘हुड़का’

उत्तराखण्ड की वादियों में जब ढोल, दमाऊ, नगाड़ा और थाली की गूँज उठती है, तो यहाँ की संस्कृति जीवंत हो उठती है। इन सभी अवनद्ध वाद्य यंत्रों (Membranophones) में एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे उत्तराखण्ड के लोक संगीत का ‘हृदय’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हम ‘बात कर रहे हैं’...

अल्मोड़ा में ब्रिटिश युग के बंगले

अल्मोड़ा हिमालय की गोद में बसा एक सुरम्य नगर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस सुन्दर नगर में छिपे हुए अनेक खूबसूरत बंगले हैं जो औपनिवेशिक युग की याद दिलाते हैं जब अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया था। अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के साथ...

उत्तराखन्ड के ताल वाद्य – “दमुआ-ढोल”

भारतीय आध्यात्मिक चेतना में नटराज शिव का आवास कैलाश पर्वत पर स्थापित है और हिमालय का समूचा शिवालिक अंचल शिव की रंगस्थली है। संगीत के आदि प्रतिपादक आदिदेव शिव के कण-कण में रमे होने के कारण ही देवभूमि का लोकजीवन भी नाद ब्रह्म से परिपूर्ण है। शिव तथा शक्ति के प्रतीक भारतीय संगीत में ‘ता’...