Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

Kumaon: Art, Craft and Culture

इंडो-यूरोपियन शैली में निर्मित है अल्मोड़ा का नार्मल स्कूल

अल्मोड़ा नगर में तराशे गये स्थानीय पत्थरों से बना गवर्नमेंट नार्मल स्कूल इंडो-यूरोपियन शैली की दर्शनीय विरासत है। यूरोपियन तथा भारतीय शिल्प समन्वय से बने इस भवन में यूरोपियन स्टाइल के बुर्ज, खिड़की, दरवाजे, मेहराब तथा...

रामकृष्ण कुटीर अल्मोड़ा

रामकृष्ण कुटीर अल्मोड़ा रामकृष्ण परमहंस परम्परा के सन्यासियों के लिए स्थापित आध्यात्मिक रिट्रीट सेंटर है। रामकृष्ण मठ तथा रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ कोलकाता द्वारा संचालित यह केन्द्र अब एक सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन हो...

कूर्मांचल की रामलीला का समृद्ध इतिहास है

देश की प्रसिद्व रामलीलाओं में कूर्माचलीय रामलीला का एक समृद्ध इतिहास है। कूर्मांचलीय रामलीला ने हिन्दी रंगमंच के इतिहास तथा देश की प्रसिद्ध रामलीलाओं में अपनी मौलिकता, कलात्मकता, संगीत एवं रागरागिनियों में निबद्ध होने...

सुरों की थाप पर संकट: आधुनिकता की मशीन में पिसती उत्तराखण्ड की विरासत ‘हुड़का’

उत्तराखण्ड की वादियों में जब ढोल, दमाऊ, नगाड़ा और थाली की गूँज उठती है, तो यहाँ की संस्कृति जीवंत हो उठती है। इन सभी अवनद्ध वाद्य यंत्रों (Membranophones) में एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे उत्तराखण्ड के लोक संगीत का...

अल्मोड़ा में ब्रिटिश युग के बंगले

अल्मोड़ा हिमालय की गोद में बसा एक सुरम्य नगर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस सुन्दर नगर में छिपे हुए अनेक खूबसूरत बंगले हैं जो औपनिवेशिक युग की याद...

उत्तराखन्ड के ताल वाद्य – “दमुआ-ढोल”

भारतीय आध्यात्मिक चेतना में नटराज शिव का आवास कैलाश पर्वत पर स्थापित है और हिमालय का समूचा शिवालिक अंचल शिव की रंगस्थली है। संगीत के आदि प्रतिपादक आदिदेव शिव के कण-कण में रमे होने के कारण ही देवभूमि का लोकजीवन भी नाद...

खोली: पत्थर के मकानों पर लकड़ी का श्रृंगार

कुमाऊँ क्षेत्र में पारंपरिक मकानों की सबसे बड़ी विशेषता उनका नक्काशीदार, भव्य एवं विशाल मुख्य प्रवेशद्वार है जिसे स्थानीय भाषा में खोली कहते हैं। खोली इन मकानों की भावनात्मक पहचान है। यह द्वार केवल घर के अंदर आने का...

बाखली – जहाँ दिल-दीवारें साझा थीं

पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा...

श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् (डोल आश्रम )कनरा अल्मोड़ा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 40 किमी दूर लमगड़ा के पास कनरा गाँव की शांत वादियों में स्थित, डोल आश्रम श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् एक आध्यात्मिक आश्रम है । घने हिमालयी जंगलों के बीच 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस...

कसार देवी मंदिर -अल्मोड़ा

अल्मोड़ा नगर से सात किमी की दूरी पर अल्मोड़ा- कफड़खान मार्ग पर पुरातन शक्तिपीठ कसारदेवी एक उंची चोटी पर स्थित है। स्कंद पुराण के मानस खंड में अल्मोड़ा के पास जिस काषाय पर्वत का उल्लेख है वह सम्भवतः कसारदेवी पर्वत ही है।...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम...

अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद

हिमालय की शांत पर्वत-श्रृंखलाओं में बसा अल्मोड़ा केवल एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नगर नहीं है, बल्कि यह भारत के महान संन्यासी और विचारक स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम...

उत्तरांचल के लोकगीतों में नंदा

अल्मोड़ा में ग्रीष्म की पीली उदास धुंधलाई संध्या की इस वेला में……..मैं एकाकी बैठा कसार देवी के शिखर पर….और देख रहा हूं सुदूर हिमाच्छादित नंदा देवी के शिखर को! थके मांदे सूरज की अस्तमुखी किरणें कुहासे में डूबे धूमिल...