उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 40 किमी दूर लमगड़ा के पास कनरा गाँव की शांत वादियों में स्थित, डोल आश्रम श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् एक आध्यात्मिक आश्रम है । घने हिमालयी जंगलों के बीच 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस आश्रम को स्थानीय लोग उत्तराखंड का पाँचवाँ धाम भी कहते हैं।

इस आश्रम की स्थापना वर्ष 1990 में तपस्वी बाबा कल्याण दास द्वारा की गई थी। अल्मोड़ा में जन्मे बाबा जी ने मात्र 12 वर्ष की अल्पायु में अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू कर दी थी। हिमालय और उड़ीसा में दशकों की कठिन तपस्या और ध्यान के बाद, वे अपने ज्ञान को दुनिया के साथ साझा करने , जन कल्याण के लिए आध्यात्मिक महापुरूष के रूप में वापस लौटे।

डोल आश्रम की स्थापना का विचार उन्हें अपनी दूसरी कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आया, इसी प्रेरणा ने उन्हें अपने गृह क्षेत्र में ध्यान और वैदिक शिक्षा का एक शक्तिशाली केंद्र स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
वर्ष 2018 में आश्रम परिसर में एक भव्य श्री यंत्र ध्यान पीठ का निर्माण हुआ एवं विश्व के सबसे बड़े अष्टधातु से निर्मित लगभग 1600 किलो भार के श्री यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा एवं स्थापना की गई। इस विशाल ध्यान कक्ष में एक साथ 300 साधक बैठ सकते हैं।

आश्रम को विशेष रूप से गहन आध्यात्मिक अभ्यास के लिए निर्मित एवं विकसित किया गया है। यहाँ सुबह 4 बजे से एक अनुशासित दिनचर्या शुरू होती है, जिसमें ध्यान, प्राणायाम और निष्कॉम कर्म योग पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।आश्रम का अपना पुस्तकालय है जहां आश्रम में प्रवास कर रहे आगन्तुकों को स्वास्थ,योग ,ध्यान एवं आयुर्वेद पर पुस्तकें उपलब्ध रहती हैं।
आश्रम की सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक इसका संस्कृत गुरुकुल विद्यालय है। यह 100 से अधिक छात्रों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करता है, जहाँ उन्हें संस्कृत, वेद और पुराणों के साथ-साथ अंग्रेजी और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषय भी सिखाए जाते हैं।
आश्रम पास के दूरदराज के गांवों के लिए एक औषधालय और एम्बुलेंस सेवा भी चलाता है, जो विशेष रूप से प्रसूति देखभाल पर ध्यान केंद्रित करती है। यहाँ पारंपरिक पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक गौशाला भी है।

आश्रम में कई उत्सव मनाए जाते हैं जिनमें हजारों भक्त शामिल होते हैं । गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित किया जाने वाला उत्सव गुरुओं के सम्मान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम है।
बुद्ध पूर्णिमा ,नवरात्रि और जन्माष्टमी त्यौहार आश्रम परिसर में स्थित माँ भगवती, भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित होते हैं।आश्रम की पवित्रता बनाए रखने के लिए, आगंतुकों से कुछ नियमों का पालन करने का अनुरोध किया जाता है।शालीन वस्त्र पहनावा अनिवार्य हैं, विशेष रूप से ध्यान और मंदिर क्षेत्रों में।

डोल आश्रम केवल एक पूजा स्थल नहीं है, यह सनातन धर्म और वैदिक जीवन शैली का एक जीवंत केंद्र है।


