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अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद

हिमालय की शांत पर्वत-श्रृंखलाओं में बसा अल्मोड़ा केवल एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नगर नहीं है, बल्कि यह भारत के महान संन्यासी और विचारक स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा में तीन बार प्रवास किया।

स्वामी विवेकानंद अल्मोड़ा नगर में तीन बार आये । यह सर्वविदित है कि स्वामी जी की अल्मोड़ा यात्रायें उनके मित्र लाला बद्रीशाह के निमंत्रण पर ही हुई थीं। पहली बार वर्ष1890 में अल्मोड़ा आए थे। तब वे एक अनजान संन्यासी थे। नैनीताल से पैदल चलकर वे यहाँ पहुँचे और कसार देवी के एकांत में ध्यान किया। उस समय उनके मित्र लाला बद्रीसाह जैसे कुछ ही लोगों से उनका सम्पर्क रहा। वे रायसाहब चिरंजीलाल साह के देवलधार स्टेट में भी कुछ दिन के लिए स्वास्थ लाभ के लिए रूके थे।

हिमांशु साह

उनकी दूसरी यात्रा वर्ष1897 में हुई, जब वे पश्चिम में वेदांत का संदेश देकर लौटे थे। वर्ष1897 में विवेकानंद का अल्मोड़ा दौरा एक बड़ी घटना थी। इस बार वे एक महानायक के रूप में आए। अल्मोड़ा के पास लोधिया में एक बड़ी भीड़ उनका इंतजार कर रही थी। जहां से एक सजे हुए घोड़े पर भारी भीड़ के साथ उन्हें नगर के मध्य रघुनाथ मंदिर तक ले जाया गया। उनके स्वागत में घरों से पुष्प वर्षा की गई और मालाओं से नगर को सजाया गया। उन्होंने रघुनाथ मंदिर के बगल में बने मंच से स्वागत के लिए खड़ी भीड़ को संबोधित किया था। उस दिन अल्मोड़ा की पूरी स्थानीय आबादी उस महान वक्ता को सुनने के लिए इकट्ठा हुई थी। उसी सभा में उन्होंने एक मुस्लिम फकीर को गले लगाया। वही व्यक्ति था जिसने उनकी अल्मोड़ा की पहली यात्रा के समय नीरव कब्रिस्तान में चेतना खोने पर पर उन्हें खीरा खिला कर उनकी प्राणरक्षा की थी।।

कौशल सक्सेना

अपने अल्मोड़ा प्रवास में उन्होंने तीन बार अल्मोड़ा के सभागारोें में भाषण दिया। उन्होंने भारतीयों और यूरोपीय लोगों की मौजूदगी में अंग्रेजी में कई भाषण दिए। यूरोपीय क्लब में दिया गया एक भाषण वेदों की शिक्षा के सिद्धांत और व्यवहार पर था। उन्होंने अल्मोड़ा इंटर कॉलेज में अपने देशवासियों को हिंदी में एक और प्रेरणादायक भाषण दिया। उन्होंने 30 जुलाई, 1897 को अपने दोस्त को एक पत्र लिखा, जिसमें लिखा था-यहां, यह हिंदी में मेरा पहला भाषण था लेकिन सभी को यह पसंद आया।

कौशल सक्सेना

वर्ष 1898 में उनकी तीसरी और अंतिम अल्मोड़ा यात्रा हुई। स्वामी विवेकानंद की प्रथम विदेशी शिष्या सिस्टर निवेदिता को कौन नहीं जानता। लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि सिस्टर निवेदिता को भारतीय ध्यान साधना और उसके अनुसरण की प्रक्रिया का ज्ञान स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा में ही दिया था। इस यात्रा में उनके साथ उनके गुरूभाई स्वामी तुरियानंद, निरंजनानंद, सदानंद तथा स्वरूपानंद के साथ-साथ विदेशी महिला भक्त श्रीमती बुल, सिस्टर निवेदिता, श्रीमती पैटरसन तथा मैक्लाउड थीं। स्वामी जी तथा सभी गुरुभाई समीप के थाम्पसन हाउस में तथा महिला अनुयायी ओकले हाउस में रूकी थीं। एलिज़ाबेथ नोबल ही आगे चलकर सिस्टर निवेदिता बनीं।


हिमांशु साह

अल्मोड़ा के ओकले हाउस में, देवदारों की छाया तले, स्वामी विवेकानंद ने उन्हें भारत के महिलाओं के जागरण एवं उनके सामाजिक उत्थान कार्यक्रमों के लिए सक्रिय होकर सामाजिक कार्य करने की अनुमति एवं प्रेरणा दी।

स्वामी विवेकानंद अपनी दो यात्राओं में लाला बद्रीसाह के रघुनाथ मंदिर के पास स्थित आवास पर ही रूके थे। आज भी यह भवन लाला बद्रीसाह के वंशजों के हाथ में एक अमूल्य धरोहर के रूप में सुरक्षित है। स्वामी जी ने जिस कक्ष में निवास किया था उसका नाम ही विवेकानंद कक्ष रख दिया गया है। इसे पूजा कक्ष का रूप दिया गया है। इस भवन में उनके प्रवास की स्मृतियाँ संजोई गई हैं। जिनमें उनकी चरण पादुकाएँ, लालटेन, प्रयोग किए गए बर्तन इत्यादि हैं। देश ही नहीं, विदेश से भी स्वामी जी के भक्त इनके दर्शन करने इस भवन में आते रहते हैं।

कौशल सक्सेना

जब स्वामी विवेकानंद तीसरी बार अल्मोड़ा आए तो वह अगस्त माह में आकाशवाणी के निकट स्थित अपने शिष्य कैप्टन सेवियर के निवास थाॅमसन हाउस में ठहरे थे। इस भवन को जेवियर दंपत्ति ने एक वर्ष के लिए स्वामी जी एवं मेहमानों के लिए किराये पर लिया था। प्रबुद्ध भारत के प्रथम सम्पादक राजाराम अय्यर की असमय मृत्यु के बाद ही प्रबुद्ध भारत का प्रकाशन अगस्त 1898 में थाॅमसन हाउस से प्रारम्भ हुआ। प्रबुद्ध भारत के कई अंक अल्मोड़ा से निकले। इस पत्रिका को प्रकाशित करने के लिए यहां प्रिंटिंग मशीन भी स्थापित की गई थी ।

हिमांशु साह

अल्मोड़ा से स्वामी जी की असीम आत्मीयता थी । सम्भवतः इसी आत्मीयता के कारण उन्होंने यह भी कहा था – उनके जीवन की अभिलाषा है कि वे अपने अंतिम दिन हिमालय की गोद में बिताएँ उस भूमि में जहाँ ऋषियों ने तप किया और दर्शन का जन्म हुआ।

कौशल सक्सेना

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