Himvan

कुमाऊँ में भी पल्लवित हुई थी ताम्र युगीन संस्कृति

हजारों वर्ष पूर्व कुमाऊँ मंडल में पल्लवित हुई ताम्र युगीन संस्कृति के अवशेष अल्मोड़ा के राजकीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं। इन अवशेषों के रूप में तांबे की बनी ऐसी मानवाकृतियां हैं जिन्हें अल्मोड़ा तथा पिथौरागढ़ जिलों से खोजा गया था। पर्वतीय क्षेत्र से वर्ष 1986 में ताम्र संस्कृति का प्रथम उपकरण एक...

हिमालय की मिनिएचर पेंटिंग के चितेरे हैं प्रभात जोशी

प्रकृति की विराटता को समझ पाना तथा उसे सूक्ष्मतम रूप में अभिव्यक्त कर देने का हुनर बिरला लोगों को ही मिलता है। अल्मो़ड़ा निवासी प्रभात जोशी भी उन बिरला लोगों में से एक हैं जिन्होंने हिमालय के विविध रंगों तथा सौंदर्य को अपने सैक़डों मिनिएचर चित्रों के माध्यम से उकेरा है। उनके लघु चित्रों में हिमालय...

होली की बैठकें खोजती हैं तारी मास्साब को

तारी मास्साब की अब केवल याद रह गई है। हालाँकि कई बरस हो गए हैं तारी मास्साब के अवसान को लेकिन उनके जाने से जो रिक्तता आई वह आज तक नहीं भर पाई है। । वे होलियारों को होली गायकी से सराबोर कर देते थे। माधुर्य लोच और तरंग का मिला हुआ रूप था उनकी गायकी।कहीं खो गया है वह स्वर। होली की बैठकों की शुरुआत...

सुरों की थाप पर संकट: आधुनिकता की मशीन में पिसती उत्तराखण्ड की विरासत ‘हुड़का’

उत्तराखण्ड की वादियों में जब ढोल, दमाऊ, नगाड़ा और थाली की गूँज उठती है, तो यहाँ की संस्कृति जीवंत हो उठती है। इन सभी अवनद्ध वाद्य यंत्रों (Membranophones) में एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे उत्तराखण्ड के लोक संगीत का ‘हृदय’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हम ‘बात कर रहे हैं’...

भक्तों की सुनते हैं बाबा नीम करोली

एक युवा तेजस्वी साधक अपनी लय में चिमटा कमंडल जैसे परम्परागत साधुओं के सामान सहित टुण्डला की ओर जाती एक रेलगाड़ी के प्रथम श्रेंणी के डिब्बे में बैठ गया। एंग्लो इंडियन टिकट चैकर को इस अधनंगे साधु की यह धृष्टता नहीं भायी ।...

कुमाऊँ के देवालय – निर्माण तथा परिरक्षण

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में प्राचीन मंदिरोंके निर्माण की परम्परा लगभग सातवीं शती से निरन्तर पल्लवित होती रही है। इस क्षेत्र में मंदिर निर्माण क्रमानुसार लकड़ी, ईंट तथा मजबूत पत्थरों इत्यादि से हुआ। लकड़ी की प्रकृति...

न्यायकारी हैं लोकदेवता कलबिष्ट

अल्मोड़ा से 16 किमी. की दूरी पर अल्मोड़ा-ताकुला मोटर मार्ग में कफड़खान से लगभग तीन किमी आगे की ओर जाकर घने जंगलों के मध्य लोकदेवता कलबिष्ट का प्रसिद्ध मंदिर है। इस स्थान को अब कलबिष्ट गैराड़ गोलू धाम के नाम से जाना जाता...

कुमाऊँ में होली गायन

ऋतुराज बसंत के आगमन और फागुन के प्रारम्भ होते ही उत्तर भारत में सर्दी का खुशनुमा मौसम उमंग भरे दिलों में मीठी सिहरन भर देता है । ऋतुराज बसंत फूलों की मादकता से मानव मन को रंग डालते हैं। फगुनाहट के परिवेश में होली पर्व...

हिमालय में प्रसारित प्रथम मुद्रायें हैं कुणिंद सिक्के

अल्मोड़ा राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा का राजकीय संग्रहालय अपनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों के कारण इतिहासविदों, मुद्रा शास्त्रियों एवं पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है। यहां प्रदर्शित दुर्लभ कुणिन्द मुद्रायें केवल अल्मोड़ा...