एक दुल्हन के लिए कुमाऊं में पिछौड़े का वही महत्व है जो एक विवाहित महिला के लिए पंजाब में फुलकारी का, लद्दाखी महिला के लिए पेराक या फिर एक हैदराबादी के लिए दुपट्टे का है। यह एक शादीशुदा मांगलिक महिला के सुहाग का प्रतीक...
Kumaon: Art, Craft and Culture
शुभता और मांगल्य की प्रतीक है कुमाउनी नथ
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में महिलाओं की मांगलिक परिधान एवं आभूषणों को लेकर यदि पहली पसंद पूंछी जाये तो उनका उत्तर होगा- पिछौड़ा एवं नथ। नथ ग्रामीण हो या शहरी सभी महिलाओं की सर्वप्रिय मांगलिक आभूषण है। शायद ही कोई...
लोकदेवता भोलानाथ की तपःस्थली है सिद्ध का नौला
अल्मोड़ा के पल्टन बाजार के प्रारम्भ होते ही सिद्ध नृसिंह मंदिर के सामने सिद्ध बाबा का नौला एवं मंदिर नगर के आस्था के प्रमुख केन्द्रों मे अपना स्थान रखता है। यहां नाथ परंपरा के चंद कालीन सिद्ध संत ऋद्धिगिरी निवास करते...
कुमाऊँ के देवालय – निर्माण तथा परिरक्षण
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में प्राचीन मंदिरोंके निर्माण की परम्परा लगभग सातवीं शती से निरन्तर पल्लवित होती रही है। इस क्षेत्र में मंदिर निर्माण क्रमानुसार लकड़ी, ईंट तथा मजबूत पत्थरों इत्यादि से हुआ। लकड़ी की प्रकृति...
ऐतिहासिक है अल्मोड़ा का रामशिला मंदिर
अल्मोड़ा नगर के अति प्राचीन देवालयों में रामशिला मंदिर का स्थान पहला है। अल्मोड़ा की बसासत के दूसरे चरण के अन्तर्गत राजा रूद्रचंद के कार्यकाल में वर्ष 1588-89 में एक नये अष्ट पहल राजनिवास का निर्माण नगर के मध्य में...
स्वामी विवेकानंद स्मारक अल्मोड़ा
महापुरूषों के जीवन में घटी घटनाओं के मूक साक्षी होने के कारण अनजान सी जगह भी कई बार पवित्र स्थली बन जाती हैं। इन स्थानों पर किया गया क्षणिक प्रवास भी इतिहास के रूप में अंकित हो जाता है। कुछ इसी तरह की कहानी...
कफ्फरकोट के शैलचित्र
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर पेटसाल में उतर कर ठीक पूर्व-उत्तर दिशा में लगभग आधा किमी. चलकर पेटसाल और पूनाकोट गाँवों के बीच में कफ्फरकोट नामक शैलाश्रय है| कफर-का अर्थ है- चट्टान और कोट का अर्थ है -दुर्ग । इस शैलाश्रय के...
गोल्ल मंदिर चितई-अल्मोड़ा
“काली गंगा में बगायो गोरी गंगा में उतरो तब गोरिया नाम पडो..” यह लोक काव्य की पंक्तियां कुमाऊँ के न्यायकारी लोकमानस के आराध्य देवता गोल्ल अथवा गोरिल के जागर में जगरियों द्वारा गायी जाती हैं । गोल्ल को कुमाऊं...
न्यायकारी हैं लोकदेवता कलबिष्ट
अल्मोड़ा से 16 किमी. की दूरी पर अल्मोड़ा-ताकुला मोटर मार्ग में कफड़खान से लगभग तीन किमी आगे की ओर जाकर घने जंगलों के मध्य लोकदेवता कलबिष्ट का प्रसिद्ध मंदिर है। इस स्थान को अब कलबिष्ट गैराड़ गोलू धाम के नाम से जाना जाता...
कायम है अल्मोड़ा की बाल मिठाई का असली स्वाद
अल्मोड़ा की बाल मिठाई और सिंगौड़ी पूरे देश में प्रसिद्ध है। एक जमाने से प्रसिद्ध इस मिठाई की लोकप्रियता के कारण एक दूसरे के यहां जाने आने पर उपहार के रूप में लोग बाल मिठाई ही ले जाते है। मैदानी क्षेत्रों में पलायन कर...

