उत्तराखण्ड की वादियों में जब ढोल, दमाऊ, नगाड़ा और थाली की गूँज उठती है, तो यहाँ की संस्कृति जीवंत हो उठती है। इन सभी अवनद्ध वाद्य यंत्रों (Membranophones) में एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे उत्तराखण्ड के लोक संगीत का...
उत्तराखन्ड के ताल वाद्य – “दमुआ-ढोल”
भारतीय आध्यात्मिक चेतना में नटराज शिव का आवास कैलाश पर्वत पर स्थापित है और हिमालय का समूचा शिवालिक अंचल शिव की रंगस्थली है। संगीत के आदि प्रतिपादक आदिदेव शिव के कण-कण में रमे होने के कारण ही देवभूमि का लोकजीवन भी नाद...
बाखली – जहाँ दिल-दीवारें साझा थीं
पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा...
मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है
हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम...
उत्तरांचल के लोकगीतों में नंदा
अल्मोड़ा में ग्रीष्म की पीली उदास धुंधलाई संध्या की इस वेला में……..मैं एकाकी बैठा कसार देवी के शिखर पर….और देख रहा हूं सुदूर हिमाच्छादित नंदा देवी के शिखर को! थके मांदे सूरज की अस्तमुखी किरणें कुहासे में डूबे धूमिल...
नन्दा : विविध रूपों में
वैदिक एवं पुराण साहित्य में हिमालय (हैमवत) को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि शिव और शक्ति का निवास स्थान कहा गया है। ऋग्वेद में हिमालय को देवताओं के निवास के रूप में वर्णित किया गया है। महाभारत में भी इसे देवताओं का...
कुमाऊँ में नंदा राजजात की परंपरा
नंदा राजजात गढ़वाल–कुमाऊँ की साझा सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान की सबसे विराट यात्रा मानी जाती है। कुमाऊँ में इसकी परंपरा, ऐतिहासिक घटनाओं और 2000 में पुनः प्रारंभ हुई भागीदारी को तीन प्रमुख चरणों में समझा जा...
पाताल देवी मंदिर अल्मोड़ा मां दुर्गा के पत्रेश्वरी रूप को समर्पित है
उत्तराखंड की धरती देवी-देवताओं की भूमि मानी जाती है, जहां प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इसी देवभूमि में स्थित है पाताल देवी मंदिर अल्मोड़ा जो मां दुर्गा के पातालेश्वरी, पत्रेश्वरी अथवा पाटेश्वरी...
न्याय देती हैं कोटगाड़ी की मां भगवती
उत्तराखंड की सुंदर पहाड़ियों में बसा कोकिला देवी कोटगाड़ी भगवती मंदिर ईश्वरीय न्याय का एक शक्तिशाली प्रतीक है। निष्पक्षता और धार्मिकता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजी जाने वाली भगवती मां की पूजा भक्तगण व्यक्तिगत...
ब्रिटिश कालीन ऐतिहासिक इमारतों का शहर भी है अल्मोड़ा
चंद राजाओं द्वारा बनाई गई ऐतिहासिक इमारतों के अतिरिक्त भी अंग्रेजी शासन काल में अल्मोड़ा शहर में अनेक सुन्दर और कलात्मक भवनों का निर्माण किया गया। इनमें नार्मल स्कूल, बडन चर्च, टैगोर हाउस, मुख्य डाकघर, रैमजे स्कूल, एडम्स...
विष्णु के वाहन हैं गरुड़
भगवान विष्णु के साथ अनिवार्य रूप से रहने वाले पक्षीराज गरूड़ का उल्लेख ऋग्वेद में सुपर्णा गरूत्मान के नाम से हुआ है। सूर्यदेव के सारथी अरूण के छोटे भाई , विनीता तथा कश्यप ऋषि की संतान गरुड़ विष्णु के वाहन हैं। कला में...
ऐतिहासिक है अल्मोड़ा का शै भैरव मंदिर
शिव रूप भैरव रक्षक देवता हैं। भारत वर्ष के अनेक किलों में उनकी स्थापना गढ़ के रक्षक के रूप में की गई है। अल्मोड़ा नगर में भी रक्षक देवता के रूप में उनकी स्थापना नगर के प्रमुख स्थानों में अष्ट भैरव रूप में की गई थी।...


















