अल्मोड़ा हिमालय की गोद में बसा एक सुरम्य नगर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस सुन्दर नगर में छिपे हुए अनेक खूबसूरत बंगले हैं जो औपनिवेशिक युग की याद...
पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा...
लोहाघाट-देवीधुरा मोटर मार्ग से सात किमी. की दूरी तथा कर्ण करायत बस स्टाप से एक किमी. की दूरी पर बाणासुर का किला एक ऊँची चोटी पर स्थित है । इस किले के दक्षिण में काली कुमाऊँ की हरी भरी घाटी विस्तार पाती है । लोहावती घाटी...
प्रागैतिहासिक मानव के कदम ज्यो-ज्यों सभ्यता की ओर की बढे उसकी पहली नजर लकड़ी पर पड़ी जो अपनी प्रकृति के कारण मानव आश्रयों के अभिप्राय गढ़ने के लिए कहीं ज्यादा उपयुक्त थी। ज्यों-ज्यों मानव का कला और अलंकरणों के प्रति झुकाव...
[ngg src=”galleries” ids=”12″ display=”basic_slideshow”] पर्वतीय क्षेत्र के पुराने पैदल यात्रा मार्ग पर जाने वाले यात्रियों को वीरान क्षेत्रों में नौ-नौ मील की दूरी पर पत्थर से बने...
प्राचीन भारतीय राज व्यवस्था में सीमाओं की सुरक्षा का प्रश्न सर्वदा महत्वपूर्ण रहा है। राज्य की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमाओं की सुरक्षा के लिए तत्कालीन शासको द्वारा की गयी व्यवस्थाओं के कई साक्ष्य दृष्टिगत होते...