उत्तराखण्ड की वादियों में जब ढोल, दमाऊ, नगाड़ा और थाली की गूँज उठती है, तो यहाँ की संस्कृति जीवंत हो उठती है। इन सभी अवनद्ध वाद्य यंत्रों (Membranophones) में एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे उत्तराखण्ड के लोक संगीत का...
भारतीय आध्यात्मिक चेतना में नटराज शिव का आवास कैलाश पर्वत पर स्थापित है और हिमालय का समूचा शिवालिक अंचल शिव की रंगस्थली है। संगीत के आदि प्रतिपादक आदिदेव शिव के कण-कण में रमे होने के कारण ही देवभूमि का लोकजीवन भी नाद...
कुमाऊँ क्षेत्र में पारंपरिक मकानों की सबसे बड़ी विशेषता उनका नक्काशीदार, भव्य एवं विशाल मुख्य प्रवेशद्वार है जिसे स्थानीय भाषा में खोली कहते हैं। खोली इन मकानों की भावनात्मक पहचान है। यह द्वार केवल घर के अंदर आने का...
पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा...
बडेन मेमोरियल मेथोडिस्ट चर्च अल्मोड़ा में स्थित एक ऐतिहासिक चर्च है। इसे जॉन हेनरी बुडेन की याद में बनाया गया था। वह एक मेथोडिस्ट मिशनरी थे जिन्होंने कई वर्षों तक अल्मोड़ा में मिशनरी सेवा की थी। चर्च गोथिक...
अल्मोड़ा नगर में तराशे गये स्थानीय पत्थरों से बना गवर्नमेंट नार्मल स्कूल इंडो-यूरोपियन शैली की दर्शनीय विरासत है। यूरोपियन तथा भारतीय शिल्प समन्वय से बने इस भवन में यूरोपियन स्टाइल के बुर्ज, खिड़की, दरवाजे, मेहराब तथा...
कुमाउनी जन जीवन में भित्तिचित्रों के अतिरिक्त भी महिलाएँ अपनी धार्मिक आस्था के आयामों को माटी की लुनाई के सहारे कलात्मक रूप से निखारती हैं। हरेला के त्योहार पर, जो प्रतिवर्ष श्रावण माह के प्रथम दिवस पड़ता है, बनाये जाने...
शोभित सक्सेना अल्मोड़ा जनपद के महत्वपूर्ण नौलों में से स्यूनराकोट का नौला शिल्प की दृष्टि से सिरमौर है। अल्मोडा से कौसानी जाने वाले मार्ग पर कोसी से आगे चल कर पक्की सड़क मुमुछीना गांव तक जाती है जहां से मात्र आधा किमी...
पर्वतीय क्षेत्रों के रिहायशी भवनों के बिभिन्न भागो को मांगलिक अवसरों पर महिलाओं द्वारा रचायेगये नयनाभिराम आलेखन नववधू जैसा सजाते हैं। चन्द्र शेखर पंत, हल्द्वानी इस क्षेत्र की महिलाओं ने अपनी लोक कला को जीवित रखने के लिए...
प्रागैतिहासिक मानव के कदम ज्यो-ज्यों सभ्यता की ओर की बढे उसकी पहली नजर लकड़ी पर पड़ी जो अपनी प्रकृति के कारण मानव आश्रयों के अभिप्राय गढ़ने के लिए कहीं ज्यादा उपयुक्त थी। ज्यों-ज्यों मानव का कला और अलंकरणों के प्रति झुकाव...