Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् (डोल आश्रम )कनरा अल्मोड़ा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 40 किमी दूर लमगड़ा के पास कनरा गाँव की शांत वादियों में स्थित, डोल आश्रम श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् एक आध्यात्मिक आश्रम है । घने हिमालयी जंगलों के बीच 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस आश्रम को स्थानीय लोग उत्तराखंड का पाँचवाँ धाम भी कहते हैं। स्वप्निल सक्सेना इस...

कसार देवी मंदिर

स्वप्निल सक्सेना अल्मोड़ा नगर से सात किमी की दूरी पर अल्मोड़ा- कफड़खान मार्ग पर पुरातन शक्तिपीठ कसारदेवी एक उंची चोटी पर स्थित है। स्कंद पुराण के मानस खंड में अल्मोड़ा के पास जिस काषाय पर्वत का उल्लेख है वह सम्भवतः कसारदेवी पर्वत ही है। शुम्भ निशुम्भ नामक दैत्यों का वध करने वाली देवी ने कौशकी रूप धारण...

मिरतोला आश्रम: आत्म निर्भर पर्वतीय ग्रामीण विकास का आदर्श रहा है

हिमालय की गोद में, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित मिरतोला आश्रम (उत्तर वृन्दावन) केवल एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्वतीय विकास की एक अनूठी प्रयोगशाला भी है। समुद्र तल से 2160 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह आश्रम पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक विकास-तीर्थ के रूप में उभर कर आया है। कौशल सक्सेना...

अल्मोड़ा की नंदादेवी और उनकी विरासत

उत्तराखंड की देवभूमि में नंदादेवी केवल एक देवी नहीं, बल्कि समूचे उत्तराखंड की सामूहिक एकरूपता की भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। अल्मोड़ा स्थित नंदादेवी मंदिर आज जिस श्रद्धा और सम्मान का केंद्र है, उसका इतिहास सदियों पुराना है और कई सांस्कृतिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। नंदादेवी की ऐतिहासिक...

पाताल देवी मंदिर अल्मोड़ा मां दुर्गा के पत्रेश्वरी रूप  को समर्पित है

उत्तराखंड की धरती देवी-देवताओं की भूमि मानी जाती है, जहां प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इसी देवभूमि में स्थित है पाताल देवी मंदिर अल्मोड़ा जो मां दुर्गा के पातालेश्वरी, पत्रेश्वरी अथवा पाटेश्वरी रूप  को समर्पित है जिन्हें नगर की ऱक्षा करने वाली नौ देवियों में से एक माना...

श्रेणी: आस्था के प्रमुख केंद्र

जन- जन के आराध्य हैं बाबा गंगनाथ

पर्वतीय क्षेत्रों में बाबा गंगनाथ का बड़ा मान है। वे जन- जन के आराध्य लोक देवता हैं। बाबा गंगनाथ की लोकप्रियता का प्रमाण जगह -जगह स्थापित किये गये उनके वे मंदिर हैं जो वनैले प्रान्तरों से लेकर ग्राम, नगर और राज्य की...

अल्मोड़ा नगर के रक्षक हैं अष्ट भैरव

उत्तराखंड में सर्वहारा वर्ग के सर्वप्रिय यदि किसी देवता का उल्लेख करना हो तो निश्चित ही वह देवता हैं-भैरव। पर्वतीय समाज में उन्हें लौकिक देवता का स्थान मिला हुआ है। उनके छोटे- छोटे मंदिर निर्जन वनों से लेकर गांव- समाज...

खगमरा कोट मंदिर

अल्मोड़ा नगर की बाहरी सीमा पर दुगालखोला के पास पुलिस लाइन के नजदीक पहुंचने वाले मोटर मार्ग में सड़क से कुछ नीचे ऐतिहासिक खगमरा कोट नामक प्राचीन स्थल है जिसे चम्पावत के चंदवंशीय शासक भीष्म चंद ने 1559-60 में कत्यूरी...

सिद्ध संतो की साधना स्थली है काकड़ीघाट का सोमवारी बाबा आश्रम

भारत में संत परम्परा के अग्रणीय संत सोमवार गिरी के काकड़ीघाट आश्रम की जानकारी कम ही लोगों को है। हल़्द्वानी से अल्मोड़ा की ओर जाने वाले मार्ग पर खैरना कस्बे से आगे कोसी नदी के तट पर पश्चिम की ओर काकड़ीघाट महान सिद्ध...

बाबा नीब करौरी की लीला स्थली है कैंची धाम

हल्द्वानी से अल्मोड़ा की ओर मोटर मार्ग पर भवाली से थोड़ी ही दूरी पर इठलाती बलखाती एक छोटी सी नदी नैनीताल एवं अल्मोड़ा जनपदों की सीमा रेखा को खींचती हुई बहती है। इस नदी को बाबा नीम करोली ने उत्तर वाहिनी नाम दिया। उत्तर...

असीम उर्जा देते हैं – गणनाथ

गणनाथ का मंदिर अत्यंत प्राचीन है । यह मंदिर अल्मोड़ा–कौसानी मार्ग पर रनमन नामक गांव से मात्र ७ किमी की दूरी पर है तथा अल्मोड़ा – ताकुला बागेश्वर मोटर मार्ग पर ताकुला से कुल 8 किसी दूरी पर है । गणनाथ का मंदिर...

लोकदेवता भोलानाथ की तपःस्थली है सिद्ध का नौला

अल्मोड़ा के पल्टन बाजार के प्रारम्भ होते ही सिद्ध नृसिंह मंदिर के सामने सिद्ध बाबा का नौला एवं मंदिर नगर के आस्था के प्रमुख केन्द्रों मे अपना स्थान रखता है। यहां नाथ परम्परा के चंद कालीन सिद्ध संत ऋद्धिगिरी निवास करते...

ऐतिहासिक है अल्मोड़ा का रामशिला मंदिर

अल्मोड़ा नगर के अति प्राचीन देवालयों में रामशिला मंदिर का स्थान पहला है। अल्मोड़ा की बसासत के दूसरे चरण के अन्तर्गत राजा रूद्रचंद के कार्यकाल में वर्ष 1588-89 में एक नये अष्ट पहल राजनिवास का निर्माण नगर के मध्य में...

गोल्ल मंदिर चितई-अल्मोड़ा

“काली गंगा में बगायो गोरी गंगा में उतरो तब गोरिया नाम पडो..” यह लोक काव्य की पंक्तियां कुमाऊँ के न्यायकारी लोकमानस के आराध्य देवता गोल्ल अथवा गोरिल के जागर में जगरियों द्वारा गायी जाती हैं । गोल्ल को कुमाऊं...

न्यायकारी हैं लोकदेवता कलबिष्ट

अल्मोड़ा से 16 किमी. की दूरी पर अल्मोड़ा-ताकुला मोटर मार्ग में कफड़खान से लगभग तीन किमी आगे की ओर जाकर घने जंगलों के मध्य लोकदेवता कलबिष्ट का प्रसिद्ध मंदिर है। इस स्थान को अब कलबिष्ट गैराड़ गोलू धाम के नाम से जाना जाता...

error: Content is protected !!