Himvan

ऐतिहासिक है अल्मोड़ा का शै भैरव मंदिर

शिव रूप भैरव रक्षक देवता हैं। भारत वर्ष के अनेक किलों में उनकी स्थापना गढ़ के रक्षक के रूप में की गई है। अल्मोड़ा नगर में भी रक्षक देवता के रूप में उनकी स्थापना नगर के प्रमुख स्थानों में अष्ट भैरव रूप में की गई थी। अल्मोड़ा में अष्ट भैरव मंदिरों की स्थापना का सम्बन्ध चंद शासक उद्योत चंद (1678-98)...

हिमालय में प्रसारित प्रथम मुद्रायें हैं कुणिंद सिक्के

अल्मोड़ा का राजकीय संग्रहालय अपनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों के कारण इतिहासविदों, मुद्रा शास्त्रियों एवं पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है। यहां प्रदर्शित दुर्लभ कुणिन्द मुद्रायें केवल अल्मोड़ा, शिमला (हिंमाचल प्रदेश) तथा ब्रिटिश म्यूजियम में ही हैं। प्रारम्भ में कुणिन्दों की मुद्रायें केवल अल्मोड़ा...

बाखली – जहाँ दिल-दीवारें साझा थीं

पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में पत्थर और पटाल से बने पुराने घरों की लंबी कतारें सहज ही आकर्षित करती हैं। इन्हें बाखली कहते हैं। आज के ‘फ्लैट कल्चर’ और बंद कमरों के मकानों के दौर में, बाखली की अवधारणा संयुक्त परिवारों के एक ही स्थान पर रहने की याद दिलाती है। कुमोटी ग्राम की बाखली...

अल्मोड़ा की नंदादेवी और उनकी विरासत

उत्तराखंड की देवभूमि में नंदादेवी केवल एक देवी नहीं, बल्कि समूचे उत्तराखंड की सामूहिक एकरूपता की भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। अल्मोड़ा स्थित नंदादेवी मंदिर आज जिस श्रद्धा और सम्मान का केंद्र है, उसका इतिहास सदियों पुराना है और कई सांस्कृतिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। नंदादेवी की ऐतिहासिक...

श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् (डोल आश्रम )कनरा अल्मोड़ा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से लगभग 40 किमी दूर लमगड़ा के पास कनरा गाँव की शांत वादियों में स्थित, डोल आश्रम श्री कल्याणिका हिमालय देव स्थानम् एक आध्यात्मिक आश्रम है । घने हिमालयी जंगलों के बीच 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस आश्रम को स्थानीय लोग उत्तराखंड का पाँचवाँ धाम भी कहते हैं। स्वप्निल सक्सेना इस...

कुमाऊँ की आराध्य देवी हैं – हाट कालिका गंगोलीहाट

यूँ तो कुमाऊँ का कण-कण सौन्दर्य से परिपूर्ण है लेकिन कुछ स्थल ऐसे भी हैं जहा जाकर मन सम्मोहन की सीमा में पहुंच जाता है । पिथौरागढ़ जनपद के गंगोलीहाट कस्बे का काली मंदिर इनमें से एक है। गंगोली कस्बे की खूबसूरत घाटी में बना हाट कालिका मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं तथा साधकों को श्रद्धा से वशीभूत करता...

ऐतिहासिक धरोहरों की अनूठी और गौरवशाली परंपरा है— बिरखम

उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्र में इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि रास्तों पर खड़े पत्थरों में भी जीवित है। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में से एक बेहद अनूठी और गौरवशाली परंपरा मिलती है—’वीर खंभ’ या बिरखम की स्थापना। उत्तर- मध्यकाल से ही इन प्रस्तर स्तम्भों को बिरखम नाम से जाना जाता...

अल्मोड़ा में स्वामी विवेकानंद

हिमालय की शांत पर्वत-श्रृंखलाओं में बसा अल्मोड़ा केवल एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नगर नहीं है, बल्कि यह भारत के महान संन्यासी और विचारक स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा में तीन बार प्रवास किया। हिमांशु साह...