Himvan :: Kumaon Art, Craft and Culture

हिलजात्रा

हिलजात्रा कुमाऊ क्षेत्र के सोर घाटी में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण उत्सव है। यह उत्सव प्रतिवर्ष भाद्र माह के शुक्लपक्ष में मनाया जाता है। यह पर्व यहां मनाये जाने वाले एक अन्य पर्व आँठू के अन्तिम दिन अथवा उससे एक दिन पहले मनाया जाता है। यह दिन गौरा एवं महेश्वर को विसर्जित करने का दिन है। हिलजात्रा...

जो नरजीवे खेले फाग

पहाड़ की होलियों का सामाजिक व सांस्कृतिक परिदृश्य कई मायनों में देश के अन्य प्रान्तों व इलाकों से अलग दिखायी देता है। दरअसल पहाड़ में होने वाली होलियां स्थानीय प्रकृति समाज के साथ बहुत गहराई के साथ जुड़ी हुई हैं। यहां की होलियों में स्थानीय लोक सम्पूर्णता के साथ समाहित है। हांलाकि यहां प्रचलित...

प्रकृति और मानव के सह-रिश्तों का पर्व है सातूं-आठूं

कुमाऊँ में ‘सातूं-आठूं’ का पर्व ‘गमरा-मैसर’ अथवा ‘गमरा उत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व नेपाल और भारत की साझी संस्कृति का प्रतीक है। पिथौरागढ़ व चंपावत जिलों के सीमावर्ती काली नदी के आर-पार के क्षेत्रों में यह पर्व समान रुप से मनाया जाता है। संस्कृति के...

नंदादेवी राजजात कुमाऊँ-2000

नंदा राजजात की परम्परा कुमाऊँ में किस तरहसे प्रारम्भ हुई इस विषय में इतिहास मौन है। नंदादेवी सम्भ्वतः कत्यूरी नरेशों की भी ईष्ट देवी थी। कत्यूरी नरेश ललितशूरदेव के ई.853 के ताम्रपत्र में वंश शाखा संस्थापक निंबर को नंदादेवी के चरण की शोभा से धन्य होना कहा गया है-भूपाल ललित कीर्ति: नंदाभगवती...

देवता आह्वानकी विशिष्ट प्रक्रिया है- जागर

कुमाउनी भाषा में जागर शब्द का अर्थ है–देवता को जागृत करना । जागर के अन्तर्गत कुमाऊँ में देवता आह्वान की वह विशिष्ट प्रक्रिया आती है जिसके अन्तर्गत गायन और नृत्य के आधार पर किसी मानव शरीर पर देवता, भूत प्रेत आदि को जागृत कर अवतरित किया जाता है । महेन्द्र बजेठा कुमाउनी परिवारों में जागर के...

श्रेणी: लोक आयोजन

नंदादेवी मेला – अल्मोड़ा

समूचे पर्वतीय क्षेत्र में हिमालय की पुत्री नंदा का बड़ा सम्मान है । उत्तराखंड में भी नंदादेवी के अनेकानेक मंदिर हैं । यहाँ की अनेक नदियाँ, पर्वत श्रंखलायें, पहाड़ और नगर नंदा के नाम पर है । नंदादेवी, नंदाकोट, नंदाभनार...

कूर्मांचल की रामलीला का समृद्ध इतिहास है

देश की प्रसिद्व रामलीलाओं में कूर्माचलीय रामलीला का एक समृद्ध इतिहास है। कूर्मांचलीय रामलीला ने हिन्दी रंगमंच के इतिहास तथा देश की प्रसिद्ध रामलीलाओं में अपनी मौलिकता, कलात्मकता, संगीत एवं रागरागिनियों में निबद्ध होने...

नन्दा राजजात

हिमालय की पुत्री और शिव की अर्धांगिंनी नंदा कुमाऊॅं और गढ़वाल वासियों के हृदय मैं रची बसी हैं। समूचे उत्तराखण्ड में उन्हें आद्याशक्ति पार्वती का रूप तो माना ही जाता है, उन्हें बहिन-बेटी मानकर भी जो स्नेह मिला है वह अन्य...

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