पहाड़ की लोक संस्कृति में ज्यूंति व थापे को बेहद शुभ व मंगलमयी माना जाता है । इस क्षेत्र में महिलायें विभिन्न पर्वाें पर जलरंगों के संयोजन से दीवारों पर कई मनोहारी चित्रणेों को मूर्त रूप देती हैं जिन्हें ज्यूंति कहा जाता...
[ngg src=”galleries” ids=”3″ exclusions=”67,37,38″ display=”basic_slideshow” gallery_width=”750500″] शिलाचित्र मानव की सुन्दरतम अभिव्यक्ति ही नहीं वरन् उसकी...
अल्मोड़ा का अन्तराष्ट्रीय बौद्ध आश्रम उच्च स्तरीय ध्यान एवं साधना करने वाले देसी विदेशी साधकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र है। यह साधना केन्द्र बौद्ध धर्म अनुयायियों की कग्युग शाखा का उत्तराखंड में स्थापित सबसे...
[ngg src=”galleries” ids=”4″ display=”basic_slideshow” gallery_width=”500″] देश के विभिन्न भागों से विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से ताम्रयुगीन उपकरण वर्ष 1822 से ही...
हिमालय की पुत्री और शिव की अर्धांगिंनी नंदा कुमाऊॅं और गढ़वाल वासियों के हृदय मैं रची बसी हैं। समूचे उत्तराखण्ड में उन्हें आद्याशक्ति पार्वती का रूप तो माना ही जाता है, उन्हें बहिन-बेटी मानकर भी जो स्नेह मिला है वह अन्य...
आजादी से पूर्व के जिन प्रखर व्यक्तित्वों के कारण अल्मोड़ा जैसे छोटे पर्वतीय नगर की विशिष्ट पहचान बनी तथा गरिमा में वृद्धि हुई उनमें आइरिन पंत उर्फ राना लियाकत अली गुलराना का नाम आज भी दीपक की ज्योति की तरह टिमटिमा रहा...