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प्रकृति की विराटता को समझ पाना तथा उसे सूक्ष्मतम रूप में अभिव्यक्त कर देने का हुनर बिरला लोगों को ही मिलता है। अल्मो़ड़ा निवासी प्रभात जोशी भी उन बिरला लोगों में से एक हैं जिन्होंने हिमालय के विविध रंगों तथा सौंदर्य को अपने सैक़डों मिनिएचर चित्रों के माध्यम से उकेरा है। उनके लघु चित्रों में हिमालय के मोहक सौंदर्य, दुरूह जनजीवन तथा लोककला की विविधता पूर्ण छवि का अवलोकन कर लोग विभोर हो जाते हैं। सृष्टि के विविध रूपों को बारीकी से उकेरने की उनकी कला के प्रशंसक विश्व भर में हैं। सधे कलाकार भी जब प्रभात जोशी के अद्भुत कला संसार का अवलोकन करते हैं तो वे उनके लघु कला संसार की बारीकियों को देख अंगुलियाँ दबा लेते हैं। ।
प्रभात जोशी पिछले तीन दशकों से मुगल मिनिएचर पेंटिंग की परम्परागत शैली से अलग स्वतंत्र प्रयोग कर अत्यंत लघु चित्रों के माध्यम से सृष्टि के विविध आयाम काग़ज पर उतार रहे हैं।
सत्रहवीं सदी के दौरान राजस्थान से लेकर उत्तराखंड तक राजाओं की कथाओं को मिनिएचर पेंटिंग में उतारने की एक समृद्ध कला शैली रही है। मुगलकाल के दौरान अस्तित्व में आई इस शैली में अत्यंत सूक्ष्म आकार में चित्रण किया जाता है। प्रभात के चित्र भी इतने छोटे आकार के हैं कि उनको बिना मैग्नीफाइंग लैंस की सहायता से भली प्रकार से देखा ही नहीं जा सकता। उनके द्वारा बनाये एक चित्र की लंबाई मात्र 1.3 सेमी है। इन चित्रों में हिमालय की विशाल हिममंडित चोटियाँ, नदियाँ, जंगल, घास लाती, चारे व पानी की तलाश में जाती महिलाओं के अत्यंत लघु चित्र शामिल हैं । हिमालय की विहंगम तथा मनोरम वादियों के अतिरिक्त यहां की लोक कला,जनजीवन आदि को भी लघु चित्रण में लाने का उन्होंने अनूठा प्रयास किया है। परम्परा से हट कर कुछ कर दिखाने की चाह में उन्होंने पूर्व से चली आ रही मुगलकाल की समृद्ध कला शैली से भिन्न प्रकृति को चित्रण का मुख्य विषय बनाकर कैनवास पर ब्रुश का सफल प्रयोग किया है। बावन वर्षीय प्रभात जोशी ने हाल ही में अपना पांच हजारवां चित्र पूरा किया।
देश के अनेक प्राँतों में अपनी इस अद्भुत कला का प्रदर्शन कर चुके प्रभात जोशी ने पिछले तीन दशकों के दौरान स्वयं को मिनिएचर पेंटिग बनाने की इस कला में एक मंझा हुआ कलाकार साबित किया है। देश-विदेश की अनेक चर्चित विभूतियों ने भी उनकी कला की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। फ्रांस, कनाडा, जर्मनी ,आस्ट्रेलिया आदि अनेक देशों के कला पारखियों तथा संग्रहालयों ने प्रभात जोशी के इन चित्रों को अपने निजी संग्रह में शामिल किया है।
प्रभात जोशी अपने चित्रों के माध्यम से अनेक प्रख्यात विभूतियों को अपनी इस कला का दीवाना बना चुके हैं। इनमें प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता एवं चित्रकार डा0 यशोधर मठपाल, ललित कला अकादमी के पूर्व निदेशक आनंद देव,डा0 मुरली मनोहर जोशी ,सुरजीत सिंह बरनाला, आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक प्रो0 राजेन्द्रसिंह, पद्म विभूषण स्व0 बी डी पांडे आदि शामिल हैं। प्रभात का मानना है कि प्रदेश बनने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि इस प्रदेश के निवासी कलाकारों की मदद के लिए सरकार आगे आकर कुछ ठोस प्रयास करेगी तथा कलाकारों के काम को सम्मान देगी । उनकी अपेक्षा है कि प्रदेश बनने के बाद सरकार कलाकारों की कुछ मदद करे, सम्मान दे तथा स्थानीय स्तर पर आर्ट गैलरी खोली जायें जिससे स्थानीय कलाकारों को काम करने का बेहतर अवसर मिला सके ।






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