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नन्दा : विविध रूपों में

वैदिक एवं पुराण साहित्य में हिमालय (हैमवत) को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि शिव और शक्ति का निवास स्थान कहा गया है। ऋग्वेद में हिमालय को देवताओं के निवास के रूप में वर्णित किया गया है। महाभारत में भी इसे देवताओं का अधिष्ठान कहा गया है। पुराणों के अनुसार हिमालय की पुत्री नन्दा/उमा हैं, जिनका विवाह शिव से हुआ। इसी कारण उनका एक नाम हैमवती (हैमवत की पुत्री) भी है।

2. पुराणों में नन्दा के स्वरूप

– देवी भागवत पुराण : नन्दा को शैलपुत्री कहा गया है।
– भविष्य पुराण : नन्दा को दुर्गा का ही रूप कहा गया है, और नौ दुर्गाओं में उनका उल्लेख है।
– ब्राह्म पुराण : दक्षकन्या सती के आत्मदाह के बाद हिमालय की पुत्री के रूप में पुनर्जन्म लेने वाली देवी को उमा (नन्दा) कहा गया है।
– मत्स्य पुराण : हिमवान और मैना से उत्पन्न तीन कन्याओं—उमा, एकपर्णा और अपर्णा—का उल्लेख है, जिनमें उमा (नन्दा) का विवाह शिव से हुआ।

3. नन्दा तीर्थ और पूजा

नंदादेवी जागर – कपिल मल्होत्रा

– देवी पुराण में शिव कहते हैं कि हिमालय में चार प्रमुख तीर्थ हैं, जिनमें सबसे श्रेष्ठ नन्दा तीर्थ है, और वही सभी देवताओं का निवास स्थान है।
– इसी ग्रंथ में भाद्रपद मास को नन्दा पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।
– कूर्म पुराण और स्कन्द पुराण (केदारखंड) में भी नन्दा तीर्थ का उल्लेख है।

4. दुर्गा सप्तशती और नन्दा

– मार्कण्डेय पुराण के दुर्गा सप्तशती (11.45-55) में नन्दा की स्तुति मिलती है। यहाँ कहा गया है कि नन्दा की भक्ति करने वाले साधक को तीनों लोक अधीन हो जाते हैं।
– इन्हें इन्दिरा, कमला, लक्ष्मी, श्री, रुक्माम्बुजासना आदि नामों से भी संबोधित किया गया है।
– दुर्गा सप्तशती (11.42-43) में भविष्यवाणी है कि अट्ठाइसवें युग में जब शुम्भ और निशुम्भ उत्पन्न होंगे, तब देवी नन्दगोप की पत्नी यशोदा के गर्भ से जन्म लेंगी और असुरों का संहार करेंगी।
– भागवत पुराण (10.2.11-13) के अनुसार यही देवी योगमाया नन्दा कही गई हैं।

5. शैलपुत्री नन्दा

– देवी भागवत और दुर्गा सप्तशती में नन्दा का शैलपुत्री स्वरूप वर्णित है—

“वन्दे वाऽहिचतलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥” ¹

– यहाँ उन्हें वृष (नंदी बैल) पर आरूढ़, त्रिशूलधारिणी और चन्द्रशेखरा कहा गया है।

6. व्यास और महाभागवत

कथा है कि जब व्यास जी अठारह पुराण लिखकर भी असंतुष्ट रहे, तो हिमालय में तप किया। तब नन्दा देवी (हैमवती) प्रकट हुईं और उनके आदेश से उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की।

7. उपनिषदों में नन्दा

– केनोपनिषद (3.12) में इन्द्र के सम्मुख प्रकट हुई देवी को हैमवती (हिमालय की पुत्री) कहा गया है।
– आदि शंकराचार्य ने अपने केनोपनिषद भाष्य में इस “हैमवती” को उमा-नन्दा ही माना है।

8. वेदों में शक्ति स्वरूप नन्दा

– ऋग्वेद (10.125, देवी सूक्त) : यहाँ वाच देवी को समस्त देवताओं की माता कहा गया है, जिसे नन्दा/आदिशक्ति का ही रूप माना जाता है।
– ऋग्वेद (1.164.33) : ऊषा को देवताओं की माता कहा गया है।
– ऋग्वेद (10.127) : रात्रि देवी का वर्णन मिलता है, जिनके गुण “काली” और “दुर्गा” से मेल खाते हैं।

निष्कर्ष

वेद, उपनिषद, पुराण और लोकपरंपरा—सभी में नन्दा देवी (हैमवती, शैलपुत्री, उमा, पार्वती) को आदिशक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है। उनके स्वरूप विविध हैं—कभी योगमाया, कभी शैलपुत्री, कभी महालक्ष्मी, तो कभी पार्वती। परंतु सभी स्वरूपों में उनका केंद्रीय भाव एक ही है—हिमालय की पुत्री और विश्व की जननी शक्ति। इसी कारण नन्दा का स्थान केवल उत्तराखण्ड की लोकदेवी के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय धर्म-दर्शन में आदिशक्ति के रूप में है।

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