कुमाऊँ क्षेत्र में पारंपरिक मकानों की सबसे बड़ी विशेषता उनका नक्काशीदार, भव्य एवं विशाल मुख्य प्रवेशद्वार है जिसे स्थानीय भाषा में खोली कहते हैं। खोली इन मकानों की भावनात्मक पहचान है। यह द्वार केवल घर के अंदर आने का रास्ता न होकर, कुमाऊँ की समृद्ध काष्ठकला का एक बेजोड़ नमूना भी है। यह स्थानीय समाज के...
उत्तराखण्ड में ताम्र शिल्प
देश के विभिन्न भागों से विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से ताम्रयुगीन उपकरण वर्ष 1822 से ही प्रकाश में आते रहे हैं। किन्तु उनकी ओर ध्यान 1905 और 1907 में सर्वप्रथम आगरा अवध प्रांत के जिला...

