बिन्सर महादेव

बिन्सर महादेव

बिस्तर महादेव नाम से प्रसिद्ध मंदिर अल्मीड़ा जनपद के ताडीरब्रेत विकासखंड में अवस्थित है । या; स्थान लगभग २री०० मीटर की उपजाई पर है । रानीखेत होते हुए बिन्सर महादेव रामनगर रोड पर पड़ता है ।

चीड़, बांज और देवदार के वनों से आच्छादित बिन्सर महादेव आश्रम को वर्तमान स्वरूप महंत श्री श्री १०८ मोहत्तेगिरी बाबा द्वारा १९६७ में दिया गया । वर्तमान में यहीं नवनिर्मित शिव मंदिर, राघाकृष्णा मंदिर, भैरव मंदिर, दल्लान्नेय मदिर एव विशाल पूजागृह बने हैं । एकान्त साधना और आध्यात्मिक ज्ञाति के लिए दिसा मालदेव की वही प्रतिष्ठा है । आसपास जाना न होने एव प्राकृतिक सुषमा से सुशोभित शति, निर्जन व कोलाहल रहित इस स्थान की शोभा अल्ला ही है ।

यह मंदिर ब्रह्म समाज के बिन्सर मंदिरों से मिना है 1३ सोनी गधेरे के जड़ पर श्मशान के बगल में ही देवालय स्थित है । मंदिर के सम्बल में प्रचलित है कि इसका निर्माण एक ऐसे भक्त ने क्रिया जो त्तन्तानहीन था । उसको शिव ने स्वान में दर्शन देकर प्रदेश दिया था कि अमुक स्थान पर

झाडी से एक शिवलिंग पडा है । उसको योग्य रशान पर स्थापित करों तभी तुम्हें संतान प्राप्ति होनी । स्वप्न में जैसा जादेश दिया गया या उस निसंतान व्यक्ति ने वैसा ही क्रिया । सन्तान होने पर उसने एक मंदिर भी बनवाया ।
जो बाद में जीर्ण हो क्या । महन्त मोहनगिरी यों अनुसार सन् १९ ६७ से मंहृत शरणमाँगैरी यमराज, जूना अखाडा, तेरागद्गी बरेली के उपदेश से सिलोर, ककलासों, फल्याक्रोट व अन्य पहियों के सहयोग से इस मंदिर का जीषर्पिद्धार क्रिया गया । बाबा ने ही भैरवनाथ, दुर्गा तथा दस्तावेय के मंदिर भी यहीं बनवाये । अश्वश्रम में मुख्य द्वार के ऊपर स्थापित कृष्ण का अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए चित्र आकर्षक है । दीवारों पर श्रीमदूभगवदमृगेता के उपदेश अंक्ति हैं । कुल मिलाकार इस मंदिर का तीन बार पहले भी जीर्णटिद्वार हो चुका है क्या चौथी वार जीर्णरिदुगृर मोहनगिरी बाबा ने किया है ।

कहा जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल से यहाँ ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा क्रो बिन्सर कौतिक नाम से विशाल मेला लगता या । बाद से इसका स्वरुप कुछ विकृत हो राया जिसके कारण अग्रेज सरकार ने यहीं प्रतिबंध लगा दिया । महंत मोहनगिरी ने मेले को एक नया रूप देकर पा, पुराण पाठ तथा शतचंडी का आयोजन करने जी परम्परा डाली है । इस आयोजन में भाग लेने के लिए हजारों की सख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचते हैं ।

जो मांगोगे वही मिलेगा, जैसी कहावतें यहीं के लिए प्रचलित हैं। इसलिए बिन्सर महादेव कोई पर्यटक स्थान न होकर श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है ।

बिन्सर मंदिर में मंदिर निर्माण से सम्बन्धित एक रोचक कथा भी लिखी गयी है । कहा जाता है कि एक ‘वाला इस वन में अपनी गायों को चराने के लिए आता था । कुछ दिन बाद प्याले ने देखा कि गाय दूध प्रतिदिन किसी ने चुराना प्रारम्भ कर दिया है । उसने एक दिन जब गायों की निगरानी की तो पाया कि वह गाय एक स्थान पर प्राकृतिक लिग पर अपना दूब छोड़ रही है । बाद में उसको नीद में भक्यान् उग़शुतोष ने उपदेश देकर कहा कि उस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवा दो । शिव की जाता अनुसार ग्वाले द्धारा उसी स्थान पर शिव मंदिर का निर्माण लिया गया ।

बिन्सर के नाम ही से प्रसिद्ध एक जन्य शिव मंदिर अस्मोड़ा से २८ किमी. दूर प्रसिद्ध पर्यटक साली बिन्सर के पास है । बिस्तर मदिर तक अब प्याली सड़क है । चंदृराज़ऱ कल्याणचंद ने बिन्सर को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी काया था। बिन्सर में बीणेश्वर महोदव का मंदिर है । राजा कल्याणचंद ने एक महल भी अपने अस्वास के लिए बनवाया था । लगभग ४५ फूट ऊँचा यह मंदिर हेमवत शेली में बनाया गया है । मंदिर के भीतरी गर्भगृह में भव्य मुख्य लिए नागपाश युक्त गणेश व अन्य र्क्स स्वी प्रतिमायें खंडित रूप में यत्र-तत्र दिखाई देती हैं ।

कुछ लोगो का मानना है कि हेनसांग द्वारा जिस ब्रह्मपुर का वग्ननि क्रिया गया है वह भोनंगेलिक स्थिती और ताम्रपत्रों के कारण अब्जाधुनिक लेसर भी हो सकता है परन्तु कुछ इतिहासकार इसे भ्रान्तिपूलक मानते हैं, जन्य इतिहासकार ब्रह्मपुर के रूप में अरुमोड़ा के नजदीक बाड़ेछीना के पास बसन्तनग्ग को भी ब्रह्मपुर की मान्यता देते हैं ।

shobhit

Follow us

Don't be shy, get in touch. We love meeting interesting people and making new friends.

Most popular

Most discussed