गणनाथ

गणनाथ

गणनाब का मंदिर अत्यंत प्राचीन है । यह मंदिर जिलगेडा-लीसानी मार्ग
पर रनमन नामक पाँव से मात्र ७ किमी. की दूरी पर है । अल्लेडा-वागेत्वर
मार्ग पर ताक्लाज्वा से कुल 8 किसी. दूरी पर है । रामनाथ का मंदिर प्राचीन
गुफा के उदर स्थित है । कुमाऊँ में जागनाथ, बागनाथ की ही तरह गणनाथ
की भी बहुत मान्यता है ।

इस मंदिर की प्रतिष्ठा एवं इष्ट देय के रूप ने मान्यता १३ वीं सदी में
मिली । इसका श्रेय पहले कल्यूरी एवं बाद से चंदराजाओ के गुरु पंडित श्री
बल्लभ उपाध्याय को है । इन्हीं के वंशजों द्वारा साज भी गणनाथ मंदिर में
पूंजाव्रइपाक्षर्णा एव क्षर्वगं। का ‘कार्य संभाल? णाशा है । पारु। जाता है कि
जागनाब की भूमि १४ ४ वर्गमील क्षेत्र में फैली थी। इसकी सीमायें पूर्व में
जटेश्वर, उत्तर में गणनाथ, पश्चिम में त्रिनेत्र एवं दक्षिण में रामेश्वर लिंग
प्रमाण हैं । स्कन्द पुराण के मानस खंड में भी गणनाथ का महात्थ है ।

गोरखों ने गणनाथ को अपनी छावनी बनाया था । जहाँ पर यह छावनी
थी वह ‘पोरखों की गढी’ के नाम से जानी जाती है । २३ अप्रेल सत् १८१५
को ब्रिटिश सेना की टुकडी ने कोसी नदी की छोर से गणनाथ को प्रस्थान
क्रिया था जिसमें गणनाथ चोटी के नजदीक विऩायकस्थल नामक मैदान पर
गोरखा सेनापति हस्तिदल की सेना के साय उसका भयऱनक युद्ध हुआ 1
इस युद्ध में सेनापति हस्तिदल मारा ज्जाया । गोरखा सरदार जैर्थारा भी अपने
बत्तीस साथियों सहित इस युद्ध से काम जाया । बाद में ब्रिटिश दुबली का
इस स्थान पर जाधिपत्य हो गया ।७

ब्बत्पानाथ जिस गुफा में अवस्थित है, लगता है कि वह चूना पत्थर की
वनी है । एक बड़े बट वृक्ष की जा से र्रशेवलिंज्जा पर निरन्तर दूधिया पानी
टपकता रहता है । कुछ लोग इसे अमृत सदृश मानते हैं ।

चंद राजाओं ने सतराली के सात गाँव गोया, कयूम, सौकाती,
तल्लीगांव, तूपाक्रोट आदि इन मंदिरों को गूँठ से चढ़त्ये । इन गाँवों से मंदिर
के लिए हर फसल पर अभी भी ‘नाली’ उगाही जाती है ।

यह स्थान असीम ज्ञाति देने वाता और क्रोत्ताहल से दूर नैसर्गिक सुषमा
से ओतप्रोत है । गुफा के एक छोर सुदर प्रपात है । मंदिर में प्रथानलिंग के
अतिरिक्त देवी, भैरव, गणेश, तूर्य के साब-साथ बैकुब्लठ विष्णु की प्रतिमा
भी है । विष्णु प्रतिमा की पादपीठ पर एक लेख अंकित है ।

शिवाजी, होती, एव कार्तिक पूर्णिमा यहीं हजारों लोग दर्शन करने
जाते हैं । मंदिर में घटिया बढाने की परम्परा है । मुख्य मंदिर से पहले
विनायक गणेश तथा दो किमी० ऊपर भगवती मतिलका का मदिर है । चैत्र
वे नवरात्रियों से भी यहीं श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है ।

Swapnil Saxena

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